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ट्रम्प ने ईरान के साथ 'ऐतिहासिक समझौते' का किया एलान, जल्द अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद

ICN24 Newsroom 12 जून 2026, 09:01 am
ट्रम्प ने ईरान के साथ 'ऐतिहासिक समझौते' का किया एलान, जल्द अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ तनाव कम करने के लिए एक बड़े समझौते की घोषणा की है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा धमाका करते हुए ईरान के साथ एक 'ऐतिहासिक समझौते' (ग्रेट सेटलमेंट) की घोषणा की है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रम्प ने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच दशकों से चला आ रहा संघर्ष अब समाप्त होने की कगार पर है। इस नए समझौते का मुख्य केंद्र ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना और मध्य पूर्व में शांति स्थापित करना है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि इस सौदे को जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के साथ बातचीत के सकारात्मक परिणाम मिले हैं और समझौते पर हस्ताक्षर होते ही 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को पूरी तरह से व्यापार के लिए फिर से खोल दिया जाएगा। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के नजरिए से यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और गैस की आपूर्ति के लिए इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर है। भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के लिए यह खबर कूटनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद अहम है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए, जो अक्सर वैश्विक तेल कीमतों के कारण स्थानीय मुद्रास्फीति से प्रभावित होते हैं, यह राहत की खबर हो सकती है। खाड़ी देशों में शांति का सीधा असर ईंधन की कीमतों पर पड़ता है। इसके अलावा, भारत का ईरान के साथ पुराना व्यापारिक रिश्ता रहा है, विशेष रूप से चाबहार बंदरगाह और ऊर्जा आयात के क्षेत्र में। अगर अमेरिका-ईरान संबंध सामान्य होते हैं, तो भारतीय कंपनियों के लिए निवेश के नए रास्ते खुल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल रहता है, तो यह ट्रम्प प्रशासन की एक बड़ी कूटनीतिक जीत होगी। हालांकि, समझौते की विस्तृत शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं। ट्रम्प ने दोहराया कि उनका उद्देश्य केवल ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकना है, न कि शासन परिवर्तन या युद्ध। उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते से ईरान की अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा होने में मदद मिलेगी, जिससे क्षेत्र में स्थिरता आएगी। आने वाले हफ्तों में इस समझौते की बारीकियों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि यह समझौता वैश्विक सुरक्षा समीकरणों को किस तरह बदलता है। ऑस्ट्रेलिया में मौजूद अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी में तनाव कम होने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) मजबूत होगी, जिसका सीधा फायदा भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई व्यापारिक संबंधों को भी मिलेगा।
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