राजनीति
तृणमूल में सुलह के संकेत: अभिषेक बनर्जी ने कहा- 'कल्याण को आलोचना का हक', वरिष्ठ सांसद बोले- 'वह मेरे बेटे जैसा'
ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 07:01 am
तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी अंदरूनी खींचतान अब कम होती दिख रही है। अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी के बीच मधुर संबंधों की वापसी से पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ आया है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर पिछले कुछ समय से चल रही खींचतान अब शांत होती दिखाई दे रही है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और वरिष्ठ लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी के बीच हालिया बयानबाजी ने राज्य की राजनीति में सुलह के नए संकेत दिए हैं। शुक्रवार को अभिषेक बनर्जी ने उदार रुख अपनाते हुए कहा कि कल्याण बनर्जी वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें आलोचना करने का पूरा अधिकार है। इसके जवाब में कल्याण बनर्जी ने भी भावुक होते हुए अभिषेक को अपने 'बेटे जैसा' बताया है।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ था जब पार्टी के 'एक व्यक्ति, एक पद' के सिद्धांत और पुरानी बनाम नई पीढ़ी के नेतृत्व को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए थे। अभिषेक बनर्जी ने कहा, "कल्याण बनर्जी मुझसे बहुत वरिष्ठ हैं। वह लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। अगर वह मेरी आलोचना करते हैं या मुझे कुछ सुझाव देते हैं, तो यह उनका लोकतांत्रिक और व्यक्तिगत अधिकार है। मैं इसे अन्यथा नहीं लेता।" उनके इस बयान को पार्टी के भीतर गुटबाजी खत्म करने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
अभिषेक बनर्जी की इस टिप्पणी के कुछ ही घंटों बाद कल्याण बनर्जी का रुख भी नरम पड़ गया। उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा, "अभिषेक बनर्जी मेरे बेटे जैसा है। वह बहुत अच्छा काम कर रहा है। राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन निजी तौर पर हमारे बीच कोई कड़वाहट नहीं है। वह भविष्य का नेता है और हम सब मिलकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी को मजबूत करेंगे।"
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर बंगाली प्रवासियों के लिए यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय अक्सर पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिरता और विकास पर नजर रखते हैं। पार्टी के भीतर इस तरह की सुलह न केवल बंगाल के प्रशासन के लिए अच्छी खबर है, बल्कि यह उन समर्थकों को भी आश्वस्त करती है जो विदेशों से राज्य की प्रगति में रुचि रखते हैं। जानकारों का मानना है कि 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के भीतर एकता बनाए रखना ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, जिसे अब अभिषेक बनर्जी सुलझाते दिख रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अभिषेक बनर्जी का यह 'सॉफ्ट पावर' दृष्टिकोण उनकी परिपक्वता को दर्शाता है। एक ओर जहां वह पार्टी को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की वकालत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वह पुराने दिग्गजों को साथ लेकर चलने की कला भी सीख रहे हैं। कल्याण बनर्जी जैसे वरिष्ठ नेताओं का समर्थन अभिषेक की नेतृत्व क्षमता पर मुहर लगाता है। फिलहाल, तृणमूल कांग्रेस के इन दो प्रमुख चेहरों के बीच की यह 'जंग' अब दोस्ती और सम्मान में बदलती दिख रही है, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में सकारात्मक संदेश गया है।
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