राजनीति
पश्चिम बंगाल: टीएमसी नेताओं पर कानून का शिकंजा, पुलिस ने जहांगीर खान की हाफ पैंट में कराई परेड
ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 10:30 pm
पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार और वसूली के आरोपों में घिरे टीएमसी नेताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जहांगीर खान और सुकुमार दत्ता की गिरफ्तारी के बाद जनता का भारी आक्रोश देखने को मिला।
पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो कद्दावर नेताओं के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई और जनता के आक्रोश की तस्वीरों ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है। दक्षिण 24 परगना के फालता में पुलिस ने जबरन वसूली के आरोपी टीएमसी नेता जहांगीर खान की हाफ पैंट में परेड कराई, जिसे लेकर विपक्ष और आम जनता के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
जहांगीर खान को 8 जून को भारत-नेपाल सीमा से उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब वे राज्य से भागने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस उन्हें जांच के सिलसिले में फालता लेकर आई थी, जहां उन्हें सार्वजनिक रूप से पैदल ले जाया गया। खान पर अवैध वसूली, धमकी और स्थानीय व्यापारियों को प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह प्रक्रिया जांच का हिस्सा थी, ताकि अपराध स्थलों की शिनाख्त की जा सके, हालांकि राजनीतिक हलकों में इसे नेता की सार्वजनिक छवि को झटका देने के तौर पर देखा जा रहा है।
वहीं, दुर्गापुर से भी ऐसी ही तनावपूर्ण खबरें सामने आईं जहां टीएमसी नेता सुकुमार दत्ता को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। दत्ता पर भ्रष्टाचार, जमीन कब्जाने और जबरन वसूली के कई मामले दर्ज हैं। जब पुलिस सुकुमार दत्ता को स्थानीय थाने से अदालत ले जाने के लिए बाहर निकली, तो वहां पहले से मौजूद गुस्साई भीड़ ने उन्हें घेर लिया। प्रदर्शनकारियों ने न केवल उनके खिलाफ नारेबाजी की, बल्कि उन पर अंडे भी फेंके।
दुर्गापुर में स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि दत्ता ने वर्षों तक उन्हें डरा-धमका कर उनकी संपत्तियों पर कब्जा किया। भीड़ का कहना था कि अब कानून को इन नेताओं के साथ कोई रियायत नहीं बरतनी चाहिए। पुलिस को प्रदर्शनकारियों को हटाने और आरोपी को सुरक्षित वाहन तक ले जाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
पश्चिम बंगाल की यह घटनाएं ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेषकर बंगाली प्रवासियों के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले अप्रवासी भारतीय अक्सर राज्य की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता को लेकर चिंतित रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पुलिस कार्रवाई यह संदेश देने की कोशिश है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अब शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जा रही है, चाहे आरोपी कितना ही रसूखदार क्यों न हो। फिलहाल, दोनों नेता पुलिस हिरासत में हैं और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
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