राजनीति
अमेरिका-ईरान शांति समझौता: इजरायली हमले के बावजूद ट्रंप और ईरान के बीच बनी सहमति की पूरी कहानी
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 10:01 am
बेरूत पर इजरायली हमले ने लगभग समझौते को खतरे में डाल दिया था, लेकिन नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप के कड़े रुख ने शांति का मार्ग प्रशस्त किया।
वाशिंगटन और तेहरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते की नींव रखने वाले आखिरी कुछ घंटे तनाव और अनिश्चितता से भरे रहे। महीनों की गोपनीय चर्चाओं के बाद, रविवार सुबह बेरूत पर हुए एक इजरायली हवाई हमले ने इस पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतारने की धमकी दी थी। इस घटनाक्रम ने न केवल मध्य पूर्व के समीकरण बदल दिए हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी इसके गहरे मायने हैं।
सूत्रों के अनुसार, जब इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर हमला किया, तो ईरान ने इसे बातचीत में बाधा डालने की सोची-समझी कोशिश करार दिया। इस हमले के तुरंत बाद नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रत्याशित रूप से इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सार्वजनिक रूप से आलोचना की। ट्रंप का यह कड़ा रुख इस बात का संकेत था कि वाशिंगटन अब क्षेत्रीय संघर्षों को लंबा खींचने के बजाय स्थायी समाधान की ओर बढ़ना चाहता है।
इस समझौते की कूटनीतिक जटिलताओं को समझने के लिए पर्दे के पीछे चल रही कोशिशों को देखना होगा। अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि पिछले कई हफ्तों से तीसरे देशों के माध्यम से बातचीत कर रहे थे। इजरायली हमले के बाद पैदा हुए गतिरोध को दूर करने के लिए खाड़ी देशों और प्रमुख वैश्विक शक्तियों ने मध्यस्थता की। ट्रंप की टीम ने स्पष्ट किया कि शांति प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का सैन्य हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जिसके बाद तेहरान ने भी नरम रुख अपनाया।
ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय समुदाय के लिए यह समझौता आर्थिक और कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय रहते हैं, जिनके व्यापारिक हित और ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर पश्चिम एशिया की स्थिरता से जुड़ी हुई है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा भारतीय प्रवासियों के लिए चिंता का विषय रही है। इस समझौते से न केवल ईंधन की कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच होने वाले त्रिपक्षीय कूटनीतिक संबंधों को भी मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन ट्रंप का 'डील-मेकर' अवतार इस बार सफल होता दिख रहा है। आने वाले हफ्तों में वाशिंगटन और तेहरान के बीच प्रतिबंधों में ढील और सुरक्षा गारंटी जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। हालांकि इजरायल के साथ संबंधों में आई यह खटास अमेरिकी विदेश नीति के लिए एक नई चुनौती पेश कर सकती है।
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