ब्रेकिंग न्यूज़ब्रेकिंग
तेलंगाना में एल नीनो का संकट: सरकार ने दी फसल चक्र बदलने की सलाह, बारिश की कमी से बढ़ी चिंता
ICN24 Newsroom 21 जुल॰ 2026, 03:35 am

तेलंगाना सरकार ने कम बारिश और एल नीनो के प्रभाव को देखते हुए कृषि रणनीति में बदलाव किया है और किसानों को धान की जगह कम पानी वाली फसलें उगाने की सलाह दी है।
तेलंगाना में मानसून की बेरुखी और एल नीनो (El Niño) के बढ़ते प्रभाव ने राज्य सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग द्वारा दर्ज की गई बारिश की भारी कमी के बीच, राज्य प्रशासन ने अब अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। कृषि विभाग ने आधिकारिक तौर पर किसानों को एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उन्हें पारंपरिक जल-प्रधान फसलों, विशेष रूप से धान (paddy) से हटकर वैकल्पिक और कम पानी वाली फसलों की ओर रुख करने का आग्रह किया गया है।
हाल के आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना के कई जिलों में सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है, जिससे जलाशयों और भूजल स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। एल नीनो की स्थिति, जो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के गर्म होने से जुड़ी है, अक्सर भारतीय मानसून को कमजोर करती है। इसी को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने एक आकस्मिक योजना (contingency plan) तैयार की है ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले झटके को कम किया जा सके। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान अब भी धान की खेती पर अड़े रहते हैं, तो फसल बर्बाद होने का जोखिम काफी अधिक है।
सरकार ने किसानों को दालें (pulses), तिलहन (oilseeds), और मोटे अनाज (millets) जैसे कि ज्वार और बाजरा उगाने के लिए प्रोत्साहित किया है। ये फसलें न केवल कम पानी में जीवित रह सकती हैं, बल्कि मौजूदा बाजार स्थितियों में किसानों को उचित लाभ भी प्रदान कर सकती हैं। कृषि अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे जमीनी स्तर पर जाकर किसानों को इन वैकल्पिक फसलों के बीजों की उपलब्धता और उनकी खेती की तकनीक के बारे में शिक्षित करें। इसके अतिरिक्त, राज्य के सिंचाई विभाग को भी आदेश दिए गए हैं कि वे उपलब्ध जल संसाधनों का प्रबंधन अत्यंत सावधानी से करें ताकि पीने के पानी की समस्या उत्पन्न न हो।
इस संकट का प्रभाव केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेष रूप से वे जो तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं, इस घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहे हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे प्रवासी भारतीयों के कई परिवारों की आजीविका आज भी भारत में उनकी कृषि भूमि पर निर्भर है। जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसम चक्र के कारण घर पर पैदा होने वाली यह अस्थिरता प्रवासी भारतीयों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। आईएनसी24 (ICN24) से बात करते हुए, कुछ प्रवासियों ने बताया कि वे अपने पैतृक गांवों में जल संचयन और आधुनिक सिंचाई तकनीकों के निवेश पर विचार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एल नीनो का प्रभाव आगामी रबी सीजन तक भी बना रह सकता है। ऐसे में, तेलंगाना सरकार की यह सक्रियता एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह उन किसानों को हर संभव सहायता प्रदान करेगी जो इस कठिन समय में अपनी कृषि पद्धति में बदलाव लाने के लिए तैयार हैं। आने वाले हफ्तों में राज्य सरकार के विभिन्न विभाग मिलकर स्थिति की साप्ताहिक समीक्षा करेंगे ताकि किसी भी गंभीर सूखे जैसी स्थिति से निपटा जा सके।
संबंधित ख़बरें

ब्रेकिंगब्रेकिंग
भारत में स्मार्टफोन मार्केट लीडर वीवो को झटका: कीमतों में बढ़ोतरी से बिक्री और बाजार हिस्सेदारी में आई गिरावट
काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, वीवो ने भारत में अपना नंबर-1 स्थान तो बरकरार रखा है, लेकिन बजट सीरीज की कीमतों में वृद्धि के कारण इसके मार्केट शेयर में गिरावट दर्ज की गई है।
21 जुल॰ 2026, 10:35 am

ब्रेकिंगब्रेकिंग
सना रईस खान ने दुबई में खरीदा लग्जरी विला; कहा- 'काम के सिलसिले में गई थी, अब वहां दूसरा घर बना लिया'
प्रसिद्ध वकील और अभिनेत्री सना रईस खान ने दुबई में एक आलीशान विला खरीदकर अपनी वैश्विक संपत्तियों में इजाफा किया है। उन्होंने इसे अपनी पेशेवर यात्रा का सुखद परिणाम बताया।
21 जुल॰ 2026, 09:35 am

ब्रेकिंगब्रेकिंग
कानपुर: खालसा गर्ल्स कॉलेज के प्रबंधक को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कानपुर के प्रसिद्ध खालसा गर्ल्स कॉलेज के प्रबंधक को कानूनी राहत देते हुए उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है।
21 जुल॰ 2026, 08:35 am
