ऑस्ट्रेलिया
ट्रंप के कैंपेन और सोशल मीडिया पोस्ट से हटाए गए टेलर स्विफ्ट के गाने, कॉपीराइट उल्लंघन का मामला आया सामने
ICN24 Newsroom 10 अग॰ 2026, 02:37 am

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी अभियानों और सोशल मीडिया पोस्ट से टेलर स्विफ्ट के गाने हटा दिए गए हैं। यह कदम संगीत अधिकारों के उल्लंघन के दावों के बाद उठाया गया है।
दुनिया की सबसे बड़ी पॉप स्टार टेलर स्विफ्ट और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच चल रहा विवाद अब एक नए कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। हालिया मीडिया रिपोर्ट्स और रॉयटर्स की पुष्टि के अनुसार, ट्रंप के चुनावी अभियान और व्हाइट हाउस से संबंधित पुराने सोशल मीडिया पोस्ट से टेलर स्विफ्ट के गानों को हटा दिया गया है। यह कार्रवाई कॉपीराइट दावों और बौद्धिक संपदा अधिकारों के उल्लंघन की शिकायतों के बाद की गई है।
यह घटनाक्रम तब सामने आया जब ट्रंप के आधिकारिक सोशल मीडिया चैनलों पर अपलोड किए गए कई वीडियो में स्विफ्ट के गानों का उपयोग बिना अनुमति के किया जा रहा था। संगीत उद्योग के सूत्रों के अनुसार, यूनिवर्सल म्यूजिक ग्रुप (UMG), जो स्विफ्ट के संगीत अधिकारों का प्रबंधन करता है, ने इन वीडियो के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप को अपने अभियानों में संगीत के इस्तेमाल के लिए कलाकारों के विरोध का सामना करना पड़ा है। इससे पहले सेलीन डियोन, रोलिंग स्टोन्स और लिंकन पार्क जैसे दिग्गज कलाकारों ने भी ट्रंप कैंपेन को अपना संगीत इस्तेमाल करने से मना किया था।
टेलर स्विफ्ट और ट्रंप के बीच का तनाव केवल संगीत तक सीमित नहीं है। हाल ही में स्विफ्ट ने आगामी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस को अपना समर्थन दिया था। इस समर्थन के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर 'आई हेट टेलर स्विफ्ट' (मुझे टेलर स्विफ्ट से नफरत है) लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। स्विफ्ट के समर्थकों, जिन्हें 'स्विफ्टीज' कहा जाता है, ने इस कदम को कलात्मक स्वतंत्रता और बौद्धिक संपदा की जीत बताया है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया में टेलर स्विफ्ट की जबरदस्त फैन फॉलोइंग है, जिसका अंदाजा इसी साल उनके 'इरास टूर' (Eras Tour) के दौरान मेलबर्न और सिडनी में उमड़ी भारी भीड़ से लगाया जा सकता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई युवा न केवल स्विफ्ट के संगीत के प्रशंसक हैं, बल्कि वे वैश्विक राजनीति और कलाकारों के राजनीतिक रुख पर भी गहरी नजर रखते हैं। ऑस्ट्रेलिया के सख्त कॉपीराइट कानूनों के बीच, इस तरह के विवाद यहां के रचनात्मक उद्योगों और भारतीय मूल के कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एक महत्वपूर्ण सबक पेश करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक अभियानों में संगीत का उपयोग एक जटिल कानूनी क्षेत्र है। हालांकि राजनेता अक्सर 'सार्वजनिक प्रदर्शन लाइसेंस' का हवाला देते हैं, लेकिन कलाकार 'पब्लिसिटी राइट्स' और 'झूठा समर्थन' (False Endorsement) के आधार पर आपत्ति जता सकते हैं। टेलर स्विफ्ट के मामले में, उनके गानों का हटना यह स्पष्ट करता है कि राजनीतिक दल अब बिना किसी समझौते या अनुमति के लोकप्रिय संस्कृति का लाभ नहीं उठा पाएंगे।
फिलहाल, ट्रंप कैंपेन की ओर से इस मुद्दे पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन गानों का हटाया जाना इस बात का संकेत है कि कानूनी दबाव काम कर रहा है। जैसे-जैसे अमेरिकी चुनाव नजदीक आ रहे हैं, यह देखना दिलचस्प होगा कि मनोरंजन जगत और राजनीति का यह टकराव मतदाताओं के बीच किस तरह की प्रतिक्रिया पैदा करता है।
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