राजनीति
19 साल बाद कोलकाता लौटीं तसलीमा नसरीन, शुभेंदु अधिकारी बोले- 'जब चाहें बंगाल आइए, पूरी सुरक्षा मिलेगी'
ICN24 Newsroom 2 अग॰ 2026, 09:36 am

निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन लगभग दो दशक बाद कोलकाता वापस लौटी हैं। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने उनकी सुरक्षा का भरोसा देते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा है।
प्रसिद्ध और विवादित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन 19 साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर कोलकाता की धरती पर कदम रख चुकी हैं। उनकी इस वापसी ने न केवल साहित्यिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी एक नया मोड़ ले लिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने तसलीमा नसरीन का स्वागत करते हुए उन्हें राज्य में पूर्ण सुरक्षा का आश्वासन दिया है। अधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि लेखिका जब भी बंगाल आना चाहें, उनका स्वागत है और उन्हें किसी भी प्रकार के खतरे से डरने की आवश्यकता नहीं है।
तसलीमा नसरीन का कोलकाता से नाता बेहद गहरा लेकिन संघर्षपूर्ण रहा है। 1994 में अपने उपन्यास 'लज्जा' के प्रकाशन के बाद कट्टरपंथियों के निशाने पर आईं नसरीन को बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने कोलकाता को अपना ठिकाना बनाया, जिसे वह अपना दूसरा घर मानती थीं। हालांकि, 2007 में शहर में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन वामपंथी सरकार के कार्यकाल के दौरान उन्हें सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कोलकाता छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। तब से वह मुख्य रूप से नई दिल्ली और विदेशों में रह रही थीं। इतने वर्षों बाद उनकी वापसी को कई लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की जीत के रूप में देख रहे हैं।
शुभेंदु अधिकारी का यह बयान राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने लेखिका को भरोसा दिलाते हुए कहा कि बंगाल की जनता उनके साथ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस मुद्दे के जरिए राज्य की ममता बनर्जी सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, विशेषकर तुष्टीकरण की राजनीति और महिला सुरक्षा के मुद्दों पर। अधिकारी ने संकेत दिया कि वर्तमान सरकार के दौर में लेखकों और विचारकों को वह सम्मान और सुरक्षा नहीं मिल रही है जिसके वे हकदार हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय और विशेषकर बंगाली समुदाय के लिए यह खबर विशेष मायने रखती है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी बंगाली अक्सर बंगाल की संस्कृति और वहां की राजनीतिक उथल-पुथल पर गहरी नजर रखते हैं। तसलीमा नसरीन के लेखन और उनके संघर्ष को ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रगतिशील भारतीय समाज में काफी सम्मान की नजर से देखा जाता है। वहां के साहित्यिक संगठनों और 'फ्री स्पीच' के समर्थकों के बीच नसरीन की सुरक्षा और उनकी वापसी एक बड़ा चर्चा का विषय बनी हुई है।
फिलहाल, तसलीमा नसरीन की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सतर्क है। हालांकि राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत बयान नहीं आया है, लेकिन शुभेंदु अधिकारी के इस खुले समर्थन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नसरीन की वापसी आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बनी रहेगी। उनके प्रशंसकों को उम्मीद है कि इस बार वह बिना किसी बाधा के शहर में रह सकेंगी और अपनी लेखनी को आगे बढ़ा सकेंगी।
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