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ताइवान: चीन के साथ संबंधों पर अमेरिका की शंकाएं दूर करने वॉशिंगटन पहुंचीं विपक्षी नेता चेंग ली-वुन

ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 05:31 pm
ताइवान: चीन के साथ संबंधों पर अमेरिका की शंकाएं दूर करने वॉशिंगटन पहुंचीं विपक्षी नेता चेंग ली-वुन

केएमटी अध्यक्ष चेंग ली-वुन अपनी दो सप्ताह की अमेरिका यात्रा के दौरान ताइवान और चीन के संबंधों पर वॉशिंगटन की चिंताओं को दूर करने का प्रयास कर रही हैं।

ताइवान की मुख्य विपक्षी पार्टी कुओमिन्तांग (KMT) की अध्यक्ष चेंग ली-वुन इन दिनों अमेरिका की दो सप्ताह की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य वॉशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में ताइवान की चीन नीति को लेकर उपजी शंकाओं को दूर करना है। यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चेंग ने हाल ही में अप्रैल महीने में चीन की यात्रा की थी, जहां उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। वॉशिंगटन में चेंग ली-वुन का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि उनकी पार्टी चीन के साथ तनाव कम करने की समर्थक तो है, लेकिन वह ताइवान की लोकतांत्रिक संप्रभुता और अमेरिका के साथ रक्षा संबंधों की कीमत पर ऐसा नहीं करेगी। अमेरिकी नीति निर्माताओं के बीच इस बात को लेकर चिंता रही है कि केएमटी का झुकाव बीजिंग की ओर अधिक हो सकता है, जिससे प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी हितों और क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ सकता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय और व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए यह कूटनीतिक घटनाक्रम काफी मायने रखता है। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही 'क्वाड' (QUAD) के सदस्य हैं और ताइवान जलडमरूमध्य में शांति बनाए रखने के पक्षधर हैं। यदि ताइवान की आंतरिक राजनीति में चीन समर्थक रुख बढ़ता है, तो इससे न केवल क्षेत्रीय व्यापार मार्ग प्रभावित होंगे, बल्कि ऑस्ट्रेलिया की सुरक्षा रणनीति और क्वाड के उद्देश्यों को भी चुनौती मिल सकती है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय-प्रवासी, जो व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में सक्रिय हैं, ताइवान की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर बहुत हद तक निर्भर हैं। अपनी बैठकों के दौरान चेंग ने इस बात पर जोर दिया है कि केएमटी की नीति 'संवाद और रक्षा' (Dialogue and Defense) के दोहरे स्तंभों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि बीजिंग के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखना युद्ध के जोखिम को कम करने के लिए आवश्यक है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का तर्क है कि चीन की विस्तारवादी नीतियों के बीच संवाद की सीमाएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चेंग की यह यात्रा आगामी चुनावों से पहले अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने का एक प्रयास है। ताइवान की राजनीति में अमेरिका का समर्थन एक निर्णायक कारक होता है। चेंग यह संदेश देना चाहती हैं कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वह अमेरिका के एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में कार्य करना जारी रखेगी और साथ ही क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक रास्तों का उपयोग करेगी।
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