राजनीति
सुप्रीम कोर्ट ने असम ट्रिब्यूनल द्वारा 'विदेशी' घोषित चार महिलाओं के निर्वासन पर लगाई रोक
ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 03:00 pm

सुप्रीम कोर्ट ने असम के फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें चार महिलाओं को विदेशी घोषित कर उनके निर्वासन का निर्देश दिया गया था।
भारत के उच्चतम न्यायालय ने असम में नागरिकता के संवेदनशील मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप करते हुए चार महिलाओं के निर्वासन पर रोक लगा दी है। इन महिलाओं को असम के फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल द्वारा 'विदेशी' घोषित किया गया था। न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली पीठ ने ट्रिब्यूनल के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश जारी किया, जिसमें दस्तावेजों में विसंगतियों के आधार पर उनकी भारतीय नागरिकता को खारिज कर दिया गया था।
मामले की जड़ें असम के फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के दिसंबर 2023 के एक आदेश में हैं। ट्रिब्यूनल ने खतून नामक महिला और अन्य की नागरिकता के दावों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उनके द्वारा प्रस्तुत पारिवारिक विवरण, आयु और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों में भारी विसंगतियां थीं। ट्रिब्यूनल के अनुसार, ये महिलाएं अपनी वंशावली और भारतीय मूल के होने के पर्याप्त प्रमाण देने में विफल रहीं, जिसके बाद उन्हें विदेशी घोषित कर निर्वासन की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि मामूली लिपिकीय त्रुटियों या उम्र के अनुमान में थोड़े अंतर को नागरिकता छीनने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने दलील दी कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के पास अक्सर सटीक जन्म रिकॉर्ड नहीं होते, और केवल इस आधार पर उन्हें राज्यविहीन (stateless) घोषित करना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। अदालत ने इन दलीलों पर गौर करते हुए केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। प्रवासी भारतीय अक्सर पहचान और नागरिकता के दस्तावेजों की महत्ता को समझते हैं। असम में चल रही एनआरसी (NRC) और ट्रिब्यूनल की प्रक्रियाएं वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय रही हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले कई असमिया मूल के प्रवासी अपने परिवार और पैतृक संपत्ति को लेकर इन कानूनी घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखते हैं। भारतीय न्यायपालिका का यह रुख दर्शाता है कि नागरिकता जैसे जीवन बदलने वाले फैसलों में दस्तावेजी बारीकियों के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण भी आवश्यक है।
यह मामला भारत में नागरिकता निर्धारण की जटिलताओं को रेखांकित करता है। असम में वर्षों से विदेशी घुसपैठ का मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक रूप से गरमाया हुआ है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट का यह हालिया हस्तक्षेप उन लोगों के लिए एक बड़ी राहत है जो कानूनी प्रक्रियाओं के जाल में फंसकर अपनी पहचान खोने की कगार पर थे। अब सबकी निगाहें अंतिम सुनवाई पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि क्या इन महिलाओं को भारतीय नागरिक के रूप में मान्यता मिल पाएगी या नहीं।
संबंधित ख़बरें

राजनीति
आज का तुला राशिफल 6 अगस्त: कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान बढ़ाने का मौका, पारिवारिक आर्थिक चर्चाओं में बरतें सावधानी
6 अगस्त का दिन तुला राशि के जातकों के लिए पेशेवर मोर्चे पर उन्नति और व्यक्तिगत संबंधों में सावधानी बरतने का मिश्रण लेकर आया है।
6 अग॰ 2026, 11:37 am
राजनीति
NEET विरोध प्रदर्शन मामले में 'जीरो एफआईआर' दर्ज: सिलीगुड़ी में दो लोगों के खिलाफ बीएनएस और पॉक्सो के तहत शिकायत
वरिष्ठ अधिवक्ता रिंकी चटर्जी सिंह ने सिलीगुड़ी साइबर पुलिस स्टेशन में अभिजीत दीपके और सौरभ दास के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें गंभीर कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।
6 अग॰ 2026, 10:37 am

राजनीति
अब्दुल अल-सय्यद की वापसी: राजनीतिक गुमनामी से मिशिगन में प्रगतिशील आंदोलन की नई लहर तक
मिशिगन की राजनीति में अब्दुल अल-सय्यद का उदय प्रवासी समुदायों के लिए मिसाल बना है, जो हार के बाद एक मजबूत प्रगतिशील आवाज के रूप में उभरे हैं।
6 अग॰ 2026, 09:38 am
