राजनीति
बाल संरक्षण को सशक्त बनाने की पहल: मध्य प्रदेश में सीडब्ल्यूसी सदस्यों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 04:01 am

मध्य प्रदेश सरकार ने बाल संरक्षण तंत्र को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाने के लिए 19 जिलों के बाल कल्याण समिति सदस्यों हेतु दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है।
भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के बाल संरक्षण तंत्र को अधिक संवेदनशील, उत्तरदायी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की है। राजधानी भोपाल में 19 जिलों के बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के नवनियुक्त सदस्यों के लिए दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण और अभिविन्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों को धरातल पर अधिक मजबूती से लागू करना है।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि बाल कल्याण समितियों की भूमिका केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि मानवीय होनी चाहिए। प्रशिक्षण के दौरान सदस्यों को बच्चों के पुनर्वास, कानूनी प्रक्रियाओं और मनोवैज्ञानिक पहलुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संकटग्रस्त बच्चों के मामलों में त्वरित निर्णय लेना और उनकी गोपनीयता बनाए रखना समिति की प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रशिक्षण सत्रों में किशोर न्याय अधिनियम, पॉक्सो (POCSO) एक्ट और दत्तक ग्रहण (Adoption) संबंधी नियमों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। वक्ताओं ने कहा कि एक सुरक्षित समाज के निर्माण के लिए बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना अनिवार्य है। विशेष रूप से उन बच्चों के लिए जो बेसहारा हैं या शोषण का शिकार हुए हैं, सीडब्ल्यूसी एक ढाल की तरह काम करती है। सदस्यों को सिखाया गया कि वे कैसे बच्चों के साथ संवाद करें ताकि बच्चा डरे बिना अपनी बात कह सके।
भारत की इस पहल का महत्व प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीयों के लिए भी प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया में भी 'चाइल्ड प्रोटेक्शन' और 'फोस्टर केयर' के कड़े नियम हैं। अक्सर भारतीय मूल के परिवारों को सांस्कृतिक भिन्नताओं के कारण स्थानीय कानूनों को समझने में कठिनाई होती है। मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में बाल कल्याण तंत्र का आधुनिक और संवेदनशील होना यह दर्शाता है कि भारत अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपने सुरक्षा ढांचे को मजबूत कर रहा है।
आने वाले समय में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को राज्य के अन्य जिलों में भी विस्तार दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि हर जिले में एक ऐसी टीम तैयार हो जो न केवल कानून का पालन करे, बल्कि सहानुभूति के साथ बच्चों के भविष्य को संवारने का कार्य भी करे। इस कार्यशाला के समापन पर सदस्यों को प्रमाण पत्र वितरित किए जाएंगे और उनके कार्यों की निरंतर निगरानी के लिए एक फीडबैक तंत्र भी विकसित किया जाएगा।
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