राजनीति
'मैंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाया': डोनाल्ड ट्रंप का नया दावा, भारत पहले ही कर चुका है खंडन
ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 02:30 pm
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोका था, जबकि भारत हमेशा तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार करता रहा है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और आगामी राष्ट्रपति चुनाव के प्रबल दावेदार डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दक्षिण एशियाई राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने अपने हालिया बयानों में यह दावा किया है कि उनके हस्तक्षेप की वजह से भारत और पाकिस्तान के बीच एक बड़ा युद्ध टल गया था। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने अतीत में ऐसे किसी भी दावे को सिरे से खारिज किया है और स्पष्ट किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच कोई भी विवाद द्विपक्षीय मामला है।
ट्रंप ने अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का गुणगान करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने दोनों पड़ोसी देशों के नेताओं के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का इस्तेमाल किया ताकि सीमा पर तनाव कम किया जा सके। यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने खुद को एक शांतिदूत के रूप में पेश किया है। इससे पहले भी वह कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की पेशकश कर चुके हैं, जिसे नई दिल्ली ने हमेशा यह कहकर ठुकरा दिया कि कश्मीर एक आंतरिक और द्विपक्षीय मुद्दा है।
भारतीय विदेश नीति के विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के ये दावे चुनावी रैलियों में अपनी विदेश नीति की 'सफलता' दिखाने का एक तरीका हो सकते हैं। भारत का रुख हमेशा से 'शिमला समझौते' और 'लाहौर घोषणापत्र' पर आधारित रहा है, जो किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देता। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह बयान महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता में अमेरिका की भूमिका पर यहाँ के प्रवासियों की गहरी नजर रहती है।
ऑस्ट्रेलियाई रणनीतिक हलकों में भी ट्रंप के इन बयानों को सावधानी से देखा जा रहा है। क्वॉड (QUAD) के सदस्य के रूप में भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के संबंध पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं। ऐसे में ट्रंप की वापसी की संभावनाओं और उनके द्वारा भारत की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर दिए गए बयानों का असर भविष्य के राजनयिक संबंधों पर पड़ सकता है। भारतीय मूल के ऑस्ट्रेलियाई नागरिक, जो दोनों देशों के बीच सेतु का काम करते हैं, अक्सर इन जटिल कूटनीतिक बयानों को क्षेत्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखते हैं।
फिलहाल, भारत सरकार ने ट्रंप के इस नवीनतम दावे पर कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, क्योंकि पुरानी स्थिति आज भी कायम है। भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह संदेश दिया है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते और पाकिस्तान के साथ किसी भी संवाद के लिए शांतिपूर्ण माहौल अनिवार्य है। ट्रंप के दावों और भारत की वास्तविकता के बीच का यह विरोधाभास आने वाले अमेरिकी चुनावों में चर्चा का विषय बना रहेगा।
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