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दक्षिण अफ्रीका में प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का एलान: राष्ट्रपति रामाफोसा ने विदेशी नागरिकों पर मढ़ा बेरोजगारी का दोष

ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 07:30 am
दक्षिण अफ्रीका में प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का एलान: राष्ट्रपति रामाफोसा ने विदेशी नागरिकों पर मढ़ा बेरोजगारी का दोष

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने देश में प्रवासियों के खिलाफ सख्त नीति की घोषणा की है, जिससे स्थानीय आबादी और विदेशियों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका है।

जोहान्सबर्ग: दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने राष्ट्र के नाम एक संबोधन में प्रवासियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की घोषणा की है। राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि स्थानीय नागरिकों की यह चिंता वाजिब है कि विदेशी नागरिक उनकी नौकरियों पर कब्जा कर रहे हैं। यह कदम एक ऐसे समय में उठाया गया है जब देश में विदेशियों के प्रति बढ़ती नफरत (जेनोफोबिया) ने पड़ोसी देशों के साथ राजनयिक संबंधों में तनाव पैदा कर दिया है। टेलीविजन पर प्रसारित अपने लाइव संबोधन में रामाफोसा ने देश की गंभीर आर्थिक स्थिति का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में स्थानीय युवाओं के बीच बेरोजगारी की दर 68 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि विदेशी नागरिकों की उपस्थिति के कारण देश के अस्पतालों और स्कूलों जैसे सार्वजनिक संसाधनों पर भारी बोझ पड़ रहा है। राष्ट्रपति का यह बयान उन समूहों के समर्थन में देखा जा रहा है जो लंबे समय से प्रवासियों को देश की आर्थिक समस्याओं का मुख्य कारण बता रहे हैं। प्रवासन पर इस सख्त रुख का असर न केवल अफ्रीकी प्रवासियों पर, बल्कि वहां बसे बड़े भारतीय मूल के समुदाय और अन्य एशियाई प्रवासियों पर भी पड़ सकता है। दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय का एक लंबा और प्रभावशाली इतिहास रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में बढ़ती आर्थिक असुरक्षा के कारण उन्हें भी छिटपुट हिंसा और भेदभाव का सामना करना पड़ा है। जानकारों का मानना है कि इस तरह की सख्त बयानबाजी से समाज में ध्रुवीकरण बढ़ सकता है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे प्रवासी समुदायों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वैश्विक स्तर पर बदलती प्रवासन नीतियों के रुझान को दर्शाती है। जहां एक ओर ऑस्ट्रेलिया जैसे देश कौशल आधारित प्रवासन को बढ़ावा देते हैं, वहीं दक्षिण अफ्रीका में स्थानीय बनाम बाहरी का संघर्ष एक चेतावनी की तरह है। यह नीति बदलाव क्षेत्रीय सहयोग को भी प्रभावित कर सकता है, क्योंकि पड़ोसी अफ्रीकी देशों ने पहले ही प्रवासियों के साथ होने वाले व्यवहार पर चिंता व्यक्त की है। सरकार ने अब प्रवासन कानूनों को और अधिक कड़ा करने और कार्य स्थलों पर औचक निरीक्षण बढ़ाने का संकेत दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दक्षिण अफ्रीकी नागरिकों को रोजगार में प्राथमिकता मिले। मानवाधिकार संगठनों ने सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे हिंसा भड़क सकती है और समस्या का समाधान ढूंढने के बजाय यह प्रवासियों को निशाना बनाने जैसा है। आने वाले हफ्तों में यह देखना होगा कि इन नीतियों का कार्यान्वयन किस प्रकार किया जाता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी क्या प्रतिक्रिया होती है।
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