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‘अप्रवासी का बेटा हूं’: पूर्व नेवी सील और नासा अंतरिक्ष यात्री जॉनी किम का हार्वर्ड में भावनात्मक संबोधन
ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 10:30 am

नासा अंतरिक्ष यात्री जॉनी किम ने हार्वर्ड में अपने संबोधन के दौरान अप्रवासी संघर्ष और सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला, जो वैश्विक भारतीय समुदाय के लिए भी प्रेरणादायी है।
मैसाचुसेट्स के कैम्ब्रिज में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक गरिमामयी समारोह में, पूर्व अमेरिकी नेवी सील और वर्तमान नासा अंतरिक्ष यात्री जॉनी किम ने एक ऐसा भाषण दिया जिसने न केवल वहां मौजूद छात्रों, बल्कि दुनिया भर के अप्रवासी समुदायों के दिलों को छू लिया। एक दक्षिण कोरियाई अप्रवासी परिवार में जन्मे किम ने अपनी उपलब्धियों के बजाय अपने संघर्षों, पारिवारिक त्रासदी और सेवा के प्रति अपने समर्पण पर ध्यान केंद्रित किया।
जॉनी किम की कहानी ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों में रहने वाले भारतीय-प्रवासी समुदायों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है। उन्होंने बताया कि कैसे एक अप्रवासी के बेटे के रूप में उन्होंने अपनी पहचान और उद्देश्य को खोजा। किम ने अपनी सैन्य सेवा, चिकित्सा पृष्ठभूमि और अंतरिक्ष यात्री बनने के सफर को एक सूत्र में पिरोते हुए कहा कि सफलता का असली पैमाना पदवी नहीं, बल्कि वह सहानुभूति है जो हम दूसरों के प्रति दिखाते हैं।
अपने संबोधन के दौरान, किम ने उन चुनौतियों का जिक्र किया जो एक 'आउटसाइडर' के रूप में महसूस होती हैं। उन्होंने उस व्यक्तिगत त्रासदी और घरेलू हिंसा के साये के बारे में भी बात की, जिसने उनके बचपन को प्रभावित किया था। किम ने कहा, "मैं एक ऐसे व्यक्ति का बेटा हूं जो बिना कुछ लिए इस देश में आया था। मेरी यात्रा केवल मेरी अपनी नहीं है, बल्कि उन हजारों लोगों की है जो बेहतर भविष्य की तलाश में अपनी जड़ों को छोड़ देते हैं।"
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए, किम का संदेश एक सशक्त अनुस्मारक है कि मेहनत और लचीलापन किसी भी बाधा को पार कर सकता है। जिस तरह भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय ने ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बने में योगदान दिया है, किम की कहानी उसी वैश्विक अप्रवासी भावना का प्रतिबिंब है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी पृष्ठभूमि को कमजोरी के बजाय अपनी सबसे बड़ी ताकत मानें।
अंत में, किम ने सेवा और निस्वार्थता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चाहे वह युद्ध का मैदान हो, अस्पताल का वार्ड हो या अंतरिक्ष का शून्य, सबसे महत्वपूर्ण चीज एक-दूसरे का साथ देना है। उनके इस भाषण को हार्वर्ड में खड़े होकर सराहना मिली, जो वर्तमान वैश्विक राजनीतिक परिवेश में समावेशिता और मानवीय गरिमा के महत्व को रेखांकित करता है।
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