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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद: स्लोवाकिया ने भारत की अस्थायी सदस्यता की दावेदारी का किया समर्थन
ICN24 Newsroom 15 जुल॰ 2026, 12:31 am

स्लोवाकिया ने 2028-29 कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी का समर्थन किया है, जो वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करता है।
मध्य यूरोपीय देश स्लोवाकिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में वर्ष 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत की अस्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी को अपना आधिकारिक समर्थन देने की घोषणा की है। यह घटनाक्रम वैश्विक कूटनीति के क्षेत्र में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण जीत माना जा रहा है, क्योंकि भारत लगातार विश्व स्तर पर अपनी भूमिका को विस्तार देने का प्रयास कर रहा है।
स्लोवाकिया का यह निर्णय भारत की बढ़ती आर्थिक और सामरिक शक्ति के प्रति एक अंतरराष्ट्रीय मान्यता के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों में प्रगाढ़ता आई है। व्यापार, प्रौद्योगिकी और रक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ने के साथ-साथ अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दोनों देश एक-दूसरे के हितों का समर्थन कर रहे हैं। स्लोवाकिया ने स्पष्ट किया कि भारत जैसे लोकतांत्रिक और शांतिप्रिय राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में उपस्थिति वैश्विक स्थिरता के लिए आवश्यक है।
भारत ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वह 2028-29 की अवधि के लिए सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए चुनाव लड़ेगा। भारत का पिछला कार्यकाल (2021-22) काफी सफल रहा था, जिसमें उसने समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोध और शांति अभियानों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर दुनिया का नेतृत्व किया था। स्लोवाकिया का समर्थन मिलने से भारत की स्थिति इस समूह में और भी मजबूत हो गई है।
ऑस्ट्रेलियाई परिप्रेक्ष्य से देखें तो यह विकास काफी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भारत की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां गर्व का विषय होती हैं। ऑस्ट्रेलिया स्वयं भारत की सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी, दोनों ही सदस्यता का मुखर समर्थक रहा है। कैनबरा और नई दिल्ली के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी और 'क्वाड' (Quad) समूह में उनकी सक्रियता यह दर्शाती है कि लोकतांत्रिक देश अब एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था चाहते हैं जहाँ भारत की भूमिका अधिक निर्णायक हो। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को मिलने वाला यह समर्थन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी शक्ति संतुलन बनाए रखने में मददगार साबित होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्लोवाकिया जैसे यूरोपीय देशों का भारत के पक्ष में आना यह संदेश देता है कि 'ग्लोबल साउथ' की आवाज अब केवल विकासशील देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि विकसित राष्ट्र भी भारत की नेतृत्व क्षमता को स्वीकार कर रहे हैं। आने वाले महीनों में भारत अन्य देशों से भी इसी तरह के समर्थन की उम्मीद कर रहा है ताकि संयुक्त राष्ट्र में अपनी दावेदारी को निर्विवाद बनाया जा सके। सुरक्षा परिषद में सुधारों की मांग के बीच, भारत का लक्ष्य अंततः एक स्थायी सदस्य के रूप में अपनी जगह सुनिश्चित करना है, और स्लोवाकिया का यह कदम उसी दिशा में एक मील का पत्थर है।
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