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सिएटल सॉकर क्लब की अनूठी मिसाल: रेफरी के समर्थन में लौटाए वर्ल्ड कप के कीमती टिकट

ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 01:01 pm
सिएटल सॉकर क्लब की अनूठी मिसाल: रेफरी के समर्थन में लौटाए वर्ल्ड कप के कीमती टिकट

सिएटल के एक सॉकर क्लब ने सोमाली रेफरी उमर अर्टान के साथ हुए भेदभाव के विरोध में करीब $20,000 मूल्य के वर्ल्ड कप टिकट वापस कर खेल जगत को चौंका दिया है।

अमेरिका के सिएटल में स्थित एक यूथ सॉकर अकादमी ने खेल जगत में नैतिकता और एकजुटता की एक नई मिसाल पेश की है। मुख्य रूप से कम आय वाले अप्रवासी बच्चों के लिए काम करने वाले इस क्लब को फीफा वर्ल्ड कप के 20 मुफ्त टिकट दिए गए थे, जिनकी कुल कीमत लगभग 20,000 डॉलर (करीब 16.5 लाख रुपये) थी। हालांकि, क्लब ने इन सभी टिकटों को वापस करने का फैसला किया है। यह कदम सोमाली रेफरी उमर अर्टान को अमेरिका द्वारा वीजा न दिए जाने के विरोध में उठाया गया है। क्लब के संस्थापक ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक विरोध नहीं है, बल्कि उन मूल्यों की रक्षा है जो खेल सिखाता है। उमर अर्टान को टूर्नामेंट में रेफरी की भूमिका निभाने से रोके जाने को क्लब ने भेदभावपूर्ण माना है। संस्थापक का कहना है कि वे इस टूर्नामेंट को टेलीविजन पर भी नहीं देखेंगे। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस अकादमी में खेलने वाले अधिकांश बच्चे खुद भी प्रवासी पृष्ठभूमि से आते हैं और वे खेल को समावेशिता के प्रतीक के रूप में देखते हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के संदर्भ में देखें तो यह घटना काफी प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया में भी फुटबॉल (सॉकर) प्रवासी समुदायों, विशेषकर दक्षिण एशियाई और अफ्रीकी मूल के युवाओं के बीच सामाजिक जुड़ाव का एक बड़ा जरिया है। अक्सर खेल के मैदान पर वीजा संबंधी जटिलताएं और नस्लीय भेदभाव जैसे मुद्दे चर्चा का विषय बनते हैं। सिएटल के इस छोटे से क्लब द्वारा इतने महंगे टिकटों का त्याग करना यह दर्शाता है कि खेल के सिद्धांतों की कीमत किसी भी आर्थिक लाभ से ऊपर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों और सरकारों के बीच वीजा नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए दबाव बना सकती है। जब एक छोटे स्तर का क्लब इतना बड़ा स्टैंड लेता है, तो यह वैश्विक मंच पर एक कड़ा संदेश भेजता है कि खेल में राजनीति और भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। अकादमी के कोचों और खिलाड़ियों ने सामूहिक रूप से इस फैसले का समर्थन किया है। उनका मानना है कि यदि उनके साथी रेफरी को बिना किसी ठोस कारण के खेलने या मैच संचालित करने के अधिकार से वंचित किया जाता है, तो स्टैंड में बैठकर जश्न मनाना उचित नहीं होगा। यह खबर सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है, जहाँ लोग इस क्लब के साहस की सराहना कर रहे हैं।
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