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सावन 2026: क्यों पहना जाता है सावन में हरा रंग? जानें हरी चूड़ियों का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

ICN24 Newsroom 22 जुल॰ 2026, 11:35 pm
सावन 2026: क्यों पहना जाता है सावन में हरा रंग? जानें हरी चूड़ियों का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

सावन के पवित्र महीने में महिलाओं द्वारा हरी चूड़ियाँ पहनना केवल फैशन नहीं, बल्कि सौभाग्य और प्रकृति से जुड़ा एक गहरा धार्मिक अनुष्ठान है।

हिंदू धर्म में सावन के महीने का विशेष महत्व है, जो भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति के लिए समर्पित है। साल 2026 में उत्तर भारत में सावन के पवित्र महीने की शुरुआत 30 जुलाई से हो रही है। इस दौरान भक्त न केवल उपवास रखते हैं और शिवलिंग का अभिषेक करते हैं, बल्कि कई पारंपरिक रीति-रिवाजों का भी पालन करते हैं। इनमें से सबसे प्रमुख परंपरा है महिलाओं द्वारा हरी चूड़ियाँ पहनना और हरे रंग के वस्त्र धारण करना। आईसीएम24 की इस विशेष रिपोर्ट में हम जानेंगे कि आखिर इस परंपरा के पीछे के धार्मिक और ज्योतिषीय कारण क्या हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो हरा रंग प्रकृति का प्रतीक है। सावन के महीने में मानसून अपनी चरम सीमा पर होता है, जिससे चारों ओर हरियाली छा जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी और स्वयं को प्रकृति के रंगों में ढाल लिया था। तब से हरा रंग सौभाग्य, वैवाहिक सुख और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम बन गया है। माना जाता है कि सावन में हरी चूड़ियाँ पहनने से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देते हैं। ज्योतिष शास्त्र में हरे रंग का संबंध बुध ग्रह (Mercury) से बताया गया है। बुध को बुद्धि, व्यापार और वाणी का कारक माना जाता है। ज्योतिषियों का मानना है कि सावन में हरा रंग पहनने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है, जिससे व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है। इसके अलावा, हरा रंग प्रजनन क्षमता (fertility) और नई शुरुआत का भी प्रतीक है। यही कारण है कि विवाहित महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में खुशहाली की कामना के लिए इस परंपरा को पूरी श्रद्धा के साथ निभाती हैं। अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या अविवाहित लड़कियां भी सावन में हरी चूड़ियाँ पहन सकती हैं? इसका उत्तर सकारात्मक है। अविवाहित युवतियां भी मनचाहा जीवनसाथी पाने और करियर में सफलता के लिए सावन के महीने में हरे रंग का उपयोग कर सकती हैं। यह न केवल उनके व्यक्तित्व में सकारात्मकता लाता है बल्कि उन्हें आध्यात्मिक रूप से भी शांत रखता है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी सावन का महत्व कम नहीं हुआ है। सिडनी के हैरिस पार्क से लेकर मेलबर्न के उपनगरों तक, भारतीय महिलाएं भले ही वहां की कड़ाके की ठंड (जुलाई-अगस्त) का सामना कर रही हों, लेकिन वे मंदिरों में पूजा-अर्चना के दौरान पारंपरिक परिधान और हरी चूड़ियाँ पहनकर अपनी संस्कृति को जीवित रखती हैं। ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख शिव मंदिरों में सावन के सोमवार को विशेष आयोजन किए जाते हैं, जहाँ प्रवासी भारतीय अपनी अगली पीढ़ी को इन परंपराओं के अर्थ समझाते हैं।
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