राजनीति
संस्कृत हमें 'विकसित भारत' की ओर ले जा सकती है: केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल
ICN24 Newsroom 20 अग॰ 2026, 11:40 pm

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने तिरुपति में 'उत्कर्ष महोत्सव 2026' का उद्घाटन करते हुए संस्कृत को विज्ञान की भाषा और देश की प्रगति का आधार बताया।
तिरुपति: केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बुधवार को आंध्र प्रदेश के तिरुपति में स्थित नेशनल संस्कृत यूनिवर्सिटी (NSU) में दो दिवसीय 'उत्कर्ष महोत्सव 2026' का भव्य उद्घाटन किया। इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए, मंत्री मेघवाल ने संस्कृत भाषा के ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि यह वह ज्ञानपुंज है जो भारत को 2047 तक 'विकसित भारत' बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मंत्री मेघवाल ने अपने संबोधन में इस बात को रेखांकित किया कि संस्कृत में विज्ञान, खगोल शास्त्र और चिकित्सा के गहरे रहस्य छिपे हुए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि हम अपनी जड़ों की ओर लौटते हैं और संस्कृत में मौजूद प्राचीन ज्ञान का आधुनिक संदर्भों में उपयोग करते हैं, तो भारत वैश्विक नवाचार और नेतृत्व में अग्रणी बन सकता है। उन्होंने कहा, 'संस्कृत को अक्सर केवल पूजा-पाठ की भाषा समझा जाता है, लेकिन वास्तव में यह तर्क और विज्ञान की भाषा है। हमारी समृद्ध विरासत ही हमारे भविष्य की नींव है।'
केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि 'विकसित भारत' का संकल्प केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अपनी सांस्कृतिक और भाषाई पहचान पर गर्व करना भी शामिल है। उन्होंने नेशनल संस्कृत यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों की सराहना की, जो प्राचीन ग्रंथों को आधुनिक पीढ़ी के लिए सुलभ बना रहे हैं। उन्होंने छात्रों और विद्वानों से आह्वान किया कि वे संस्कृत के माध्यम से समाज की समकालीन चुनौतियों का समाधान खोजें।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के संदर्भ में देखें तो यह संदेश काफी महत्वपूर्ण है। विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए संस्कृत और अपनी मातृभाषाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में संस्कृत शिक्षा के प्रति बढ़ते रुझान के बीच, मंत्री का यह बयान भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को भी मजबूत करता है। प्रवासी भारतीयों के लिए संस्कृत एक ऐसा सेतु है जो उन्हें उनकी जड़ों से जोड़ता है और अगली पीढ़ी को भारतीय मूल्यों से परिचित कराता है।
उत्कर्ष महोत्सव में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि और संस्कृत विद्वान हिस्सा ले रहे हैं। इस दो दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए नई रणनीतियां बनाना और इसके तकनीकी पहलुओं पर चर्चा करना है। मंत्री मेघवाल ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में संस्कृत भारत की वैश्विक छवि को निखारने में 'सॉफ्ट पावर' के रूप में उभरेगी।
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