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रूस का दावा: पूर्वी यूक्रेन के दो और गांवों पर किया कब्जा, मोर्चे पर भीषण जंग जारी
ICN24 Newsroom 10 अग॰ 2026, 11:39 am

रूस ने पूर्वी यूक्रेन में दो और गांवों पर नियंत्रण का दावा किया है, जबकि कीव ने सीमा पर भीषण संघर्ष की रिपोर्ट दी है। युद्ध का यह नया विस्तार वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है।
रूस के रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर दावा किया है कि उसकी सेना ने पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में दो और महत्वपूर्ण गांवों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। रूसी दावों के अनुसार, 'जेलेने पोले' और 'वोदयान' नामक इन बस्तियों को रणनीतिक बढ़त हासिल करने के बाद कब्जे में लिया गया है। हालांकि, यूक्रेन की ओर से अभी तक इन विशिष्ट क्षेत्रों को खोने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कीव ने स्वीकार किया है कि पूरे मोर्चे पर युद्ध की स्थिति बेहद तनावपूर्ण और भीषण बनी हुई है।
यूक्रेनी जनरल स्टाफ की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों में फ्रंटलाइन पर 100 से अधिक सैन्य झड़पें दर्ज की गई हैं। यूक्रेनी सेना ने कहा कि रूस लगातार अपनी तोपखाने और हवाई शक्ति का उपयोग कर उनके रक्षा कवच को तोड़ने की कोशिश कर रहा है। विशेष रूप से पोक्रोव्स्क और कुराखोव सेक्टरों में संघर्ष अपनी चरम सीमा पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस सर्दी के मौसम से पहले डोनेट्स्क क्षेत्र में अपनी स्थिति को और मजबूत करना चाहता है ताकि वह वार्ता की मेज पर ऊपरी हाथ रख सके।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए इस युद्ध के गहरे निहितार्थ हैं। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में बसे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक इस वैश्विक अस्थिरता के आर्थिक प्रभाव को महसूस कर रहे हैं। यूक्रेन-रूस संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं ने ऑस्ट्रेलिया में ईंधन की कीमतों और जीवन यापन की लागत (Cost of Living) में वृद्धि की है। इसके अतिरिक्त, भारतीय छात्र जो पहले यूक्रेन में शिक्षा प्राप्त कर रहे थे, वे भी इस अनिश्चितता के कारण प्रभावित हुए हैं, जिनमें से कई अब ऑस्ट्रेलिया में वैकल्पिक शैक्षणिक अवसर तलाश रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, इस सैन्य बढ़त को रूस की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसके तहत वह धीरे-धीरे यूक्रेनी संसाधनों को खत्म करना चाहता है। पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को सैन्य सहायता जारी रखने का वादा किया है, लेकिन जमीनी हकीकत तेजी से बदल रही है। भारत ने इस मामले पर हमेशा की तरह कूटनीतिक संतुलन बनाए रखा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बार-बार 'युद्ध के बजाय संवाद' के मार्ग पर जोर दिया है। ऑस्ट्रेलिया ने भी यूक्रेन का पुरजोर समर्थन किया है, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की भू-राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यूक्रेन इन क्षेत्रों को वापस पाने के लिए कोई बड़ा जवाबी हमला (Counter-offensive) करता है या रूस अपनी पकड़ और मजबूत कर लेता है। फिलहाल, पूर्वी यूक्रेन का यह हिस्सा धुएं और गोलाबारी की चपेट में है, जिससे मानवीय संकट और गहराता जा रहा है।
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