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चावल और मधुमेह: बेहतर स्वास्थ्य के लिए सोच-समझकर करें चुनाव
ICN24 Newsroom 15 अग॰ 2026, 04:37 pm

भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय में बढ़ते मधुमेह के मामलों के बीच विशेषज्ञों ने चावल के सेवन और स्वास्थ्य विकल्पों को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए चावल केवल आहार का एक हिस्सा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और दैनिक जीवन का एक अनिवार्य तत्व है। हालांकि, आधुनिक जीवनशैली और शारीरिक सक्रियता में कमी के कारण, दक्षिण एशियाई मूल के लोगों में टाइप 2 मधुमेह (Type 2 Diabetes) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। हालिया शोध और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, चावल का चयन और उसे खाने का तरीका स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
सफेद चावल, जो अधिकांश भारतीय घरों में पसंद किया जाता है, रिफाइनिंग प्रक्रिया से गुजरता है। इस प्रक्रिया में चावल की बाहरी परत (ब्रान) और भ्रूण (जर्म) को हटा दिया जाता है, जिससे इसमें फाइबर और आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) अधिक होता है, जिसका अर्थ है कि यह रक्त में शर्करा के स्तर को तेजी से बढ़ाता है। मधुमेह रोगियों या इस बीमारी के जोखिम वाले लोगों के लिए यह एक चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों के अनुसार, 'ब्राउन राइस' (भूरा चावल) एक स्वास्थ्यप्रद विकल्प के रूप में उभर रहा है। ब्राउन राइस में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन प्रक्रिया को धीमा करती है और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करती है। इसके अलावा, इसमें मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे खनिज भी प्रचुर मात्रा में होते हैं। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के सुपरमार्केट में मिलने वाले विभिन्न प्रकार के चावलों में से चुनाव करना कभी-कभी कठिन हो सकता है। कम GI वाले बासमती चावल को भी एक बेहतर विकल्प माना जाता है, बशर्ते इसे संतुलित मात्रा में खाया जाए।
सिर्फ चावल बदलना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे खाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य सलाहकार सुझाव देते हैं कि भारतीय समुदाय को अपनी 'थाली' में संतुलन बनाना चाहिए। चावल की मात्रा कम करके उसमें अधिक मात्रा में दाल, सब्जियां और प्रोटीन (जैसे पनीर, टोफू या मांस) शामिल करना चाहिए। यह मेल न केवल भोजन को अधिक पौष्टिक बनाता है, बल्कि पूरे भोजन के ग्लाइसेमिक लोड को कम कर देता है, जिससे भोजन के बाद शुगर अचानक नहीं बढ़ती।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीयों के लिए एक और व्यावहारिक टिप चावल को पकाने और ठंडा करने की विधि है। पके हुए चावल को ठंडा करने से उसमें 'रेसिस्टेंट स्टार्च' (Resistant Starch) की मात्रा बढ़ जाती है, जो मधुमेह के प्रबंधन में सहायक हो सकता है। ICN24 की रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का अर्थ भोजन का त्याग करना नहीं, बल्कि स्मार्ट विकल्प चुनना है। अपने आहार में छोटे बदलाव करके और नियमित व्यायाम को शामिल करके, भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय मधुमेह जैसी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है।
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