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Re-NEET UG 2026: प्रश्नपत्र तैयार करने वाली टीम सख्त 'लॉकडाउन' में, बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह कटा

ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 11:00 pm
Re-NEET UG 2026: प्रश्नपत्र तैयार करने वाली टीम सख्त 'लॉकडाउन' में, बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह कटा

NEET UG 2026 की दोबारा परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने वाली टीम को एक गोपनीय स्थान पर सुरक्षा घेरे में रखा गया है। परीक्षा संपन्न होने तक इंटरनेट और फोन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 की शुचिता सुनिश्चित करने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और संबंधित अधिकारियों ने अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आगामी री-नीट (Re-NEET) के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों और पैनल के सदस्यों को एक अत्यंत गोपनीय स्थान पर 'लॉकडाउन' जैसी परिस्थितियों में रखा गया है। यह कदम प्रश्नपत्र लीक होने की किसी भी संभावना को शून्य करने और परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। सूत्रों के अनुसार, प्रश्नपत्र तैयार करने वाली टीम के लिए सख्त प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं। इन विशेषज्ञों को न केवल बाहरी दुनिया से मिलने-जुलने की मनाही है, बल्कि उनके स्मार्टफोन, लैपटॉप और किसी भी प्रकार के इंटरनेट डिवाइस को जब्त कर लिया गया है। जब तक परीक्षा का अंतिम चरण संपन्न नहीं हो जाता, तब तक ये सदस्य सुरक्षा बलों की निगरानी में रहेंगे और अपने परिवार से भी संपर्क नहीं कर सकेंगे। इस पूरी प्रक्रिया को 'आइसोलेशन' कहा जा रहा है, जिसका उद्देश्य सूचनाओं के किसी भी संभावित आदान-प्रदान को रोकना है। विगत वर्षों में नीट परीक्षा को लेकर हुए विवादों और पेपर लीक के आरोपों के बाद, शिक्षा मंत्रालय ने इस बार सुरक्षा मानकों को वैश्विक स्तर का बनाने का निर्णय लिया है। गोपनीय केंद्र के भीतर केवल उन्हीं उपकरणों की अनुमति है जो नेटवर्क से जुड़े नहीं हैं और जिनकी निगरानी चौबीसों घंटे की जा रही है। सुरक्षा के इस कड़े घेरे में सीसीटीवी कैमरों और जैमर्स का भी उपयोग किया जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल केंद्र के बाहर न जा सके। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय (NRIs) अपने बच्चों को मेडिकल की पढ़ाई के लिए भारत भेजते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के कई छात्र भी नीट की तैयारी में जुटे रहते हैं। परीक्षा प्रणाली में इस प्रकार की पारदर्शिता और सख्ती की खबरें उन अभिभावकों के लिए राहत लेकर आई हैं, जो अक्सर पेपर लीक और धांधली की खबरों से चिंतित रहते थे। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय परिवारों का मानना है कि परीक्षा प्रक्रिया में विश्वास बहाल करने के लिए ऐसे कड़े कदम आवश्यक हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रश्नपत्र तैयार करने वालों को एकांत में रखना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार का स्तर 'डिजिटल लॉकडाउन' जैसा है। इसका मुख्य कारण तकनीकी हैकिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी फैलने का डर है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा संपन्न होने के बाद ही इन विशेषज्ञों को वापस जाने की अनुमति दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2026 की परीक्षा बिना किसी विवाद के पूरी हो और योग्य छात्रों को ही मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मिले।
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