राजनीति
राज्यसभा में 'एंटी-पेपर लीक' बिल पास: नकल माफियाओं को होगी 10 साल तक की जेल, 1 करोड़ का जुर्माना
ICN24 Newsroom 31 जुल॰ 2026, 04:36 am

राज्यसभा ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक पारित कर दिया है, जिसका उद्देश्य पेपर लीक और संगठित नकल माफिया पर नकेल कसना है।
भारत की संसद ने देश की शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्यसभा ने गुरुवार को 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक' को अपनी मंजूरी दे दी। लोकसभा से पहले ही पारित हो चुके इस विधेयक को अब राष्ट्रपति की सहमति के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह कानून का रूप ले लेगा। यह कानून विशेष रूप से उन संगठित समूहों और संस्थानों को निशाना बनाता है जो पेपर लीक और नकल जैसी गतिविधियों के जरिए देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं।
इस नए कानून के तहत सजा के बेहद सख्त प्रावधान किए गए हैं। विधेयक के अनुसार, पेपर लीक या परीक्षा में धांधली करने वाले संगठित सिंडिकेट के दोषियों को न्यूनतम पांच साल की जेल की सजा होगी, जिसे 10 साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही, दोषियों पर कम से कम 1 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा। यदि कोई परीक्षा केंद्र या संस्था इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाई जाती है, तो उस पर परीक्षा की पूरी लागत वसूलने के साथ-साथ उसकी संपत्ति कुर्क करने का भी प्रावधान है। सरकार का स्पष्ट कहना है कि यह कानून निर्दोष छात्रों को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि उन 'माफियाओं' को पकड़ने के लिए है जो सिस्टम की खामियों का फायदा उठाते हैं।
यह विधेयक ऐसे समय में आया है जब भारत में नीट (NEET) और यूजीसी-नेट (UGC-NET) जैसी बड़ी परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर देशभर में प्रदर्शन हुए थे। शिक्षा मंत्री ने सदन में चर्चा के दौरान आश्वासन दिया कि सरकार परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार के लिए विशेषज्ञों की एक समिति पहले से ही काम कर रही है। नए कानून के दायरे में यूपीएससी (UPSC), एसएससी (SSC), रेलवे, बैंकिंग और एनटीए द्वारा आयोजित की जाने वाली सभी प्रमुख सार्वजनिक परीक्षाएं आएंगी।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह समाचार काफी महत्वपूर्ण है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के कई परिवारों के बच्चे या रिश्तेदार अक्सर उच्च शिक्षा या सरकारी नौकरियों के लिए भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेते हैं। ऑस्ट्रेलिया में बस चुके कई एनआरआई (NRI) भारत के मजबूत और निष्पक्ष शिक्षा तंत्र को अपने देश की प्रगति का आधार मानते हैं। पेपर लीक की घटनाओं से न केवल भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित होती है, बल्कि प्रवासी भारतीयों में भी अपने मूल देश की मेरिट प्रणाली को लेकर चिंता बनी रहती है। इस कड़े कानून के आने से विदेशों में बैठे भारतीय समुदाय में यह विश्वास जगेगा कि भारत अब अपनी परीक्षा प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप सुरक्षित बनाने के लिए तैयार है।
कुल मिलाकर, यह विधेयक भारत की प्रतियोगी परीक्षाओं के इतिहास में एक 'वाटरशेड' पल साबित हो सकता है। सरकार को उम्मीद है कि भारी जुर्माने और लंबी जेल की सजा के डर से नकल माफियाओं पर लगाम लगेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून बना देना ही काफी नहीं होगा, बल्कि डिजिटल बुनियादी ढांचे और पेपर सेटिंग की प्रक्रिया में भी तकनीकी बदलाव करने होंगे ताकि किसी भी स्तर पर मानवीय हस्तक्षेप या चूक की गुंजाइश न रहे।
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