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पंजाब की सियासत में हलचल: मान की भविष्यवाणी, खुड्डियां पर 'चेकमेट' और कैप्टन का बरकरार रसूख

ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 08:30 pm
पंजाब की सियासत में हलचल: मान की भविष्यवाणी, खुड्डियां पर 'चेकमेट' और कैप्टन का बरकरार रसूख

पंजाब की राजनीति में मुख्यमंत्री भगवंत मान की सटीक भविष्यवाणी और आम आदमी पार्टी के भीतर आंतरिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

पंजाब की सियासत इन दिनों चर्चाओं और रणनीतिक दांव-पेचों के केंद्र में है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की राजनीतिक भविष्यवाणियों से लेकर आम आदमी पार्टी के भीतर चल रही आंतरिक खींचतान तक, राज्य के गलियारों में कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। हालिया घटनाक्रमों ने न केवल राज्य की राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि सात समंदर पार ऑस्ट्रेलिया में बसे पंजाबी समुदाय के बीच भी गहरी दिलचस्पी पैदा कर दी है। सबसे अधिक चर्चा मुख्यमंत्री भगवंत मान की उस भविष्यवाणी की हो रही है, जिसे अब '32 का सिद्धांत' कहा जा रहा है। मान ने पहले ही संकेत दिया था कि विपक्षी गठबंधन और आंतरिक विरोधियों की स्थिति क्या होगी, जो अब सच होती दिख रही है। उनके इस आत्मविश्वास ने पार्टी के भीतर उनकी स्थिति को और मजबूत किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मान अब प्रशासन और संगठन दोनों पर अपनी पकड़ पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर चुके हैं। वहीं दूसरी ओर, कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां को लेकर पार्टी के भीतर 'चेकमेट' जैसी स्थिति देखी जा रही है। आप नेतृत्व द्वारा आंतरिक असंतोष को जिस तरह से नियंत्रित किया जा रहा है, वह पार्टी की नई अनुशासन नीति की ओर इशारा करता है। खुड्डियां, जिन्होंने लंबी के चुनावी रण में बड़े दिग्गजों को धूल चटाई थी, अब प्रशासनिक नियुक्तियों और विभागीय फैसलों में खुद को एक अलग चुनौती का सामना करते हुए पा रहे हैं। इसे पार्टी आलाकमान द्वारा सत्ता संतुलन बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इसी बीच, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का राजनीतिक प्रभाव एक बार फिर चर्चा का विषय है। भले ही वह अब कांग्रेस का हिस्सा नहीं हैं और भाजपा में शामिल हो चुके हैं, लेकिन पंजाब की सत्ता के गलियारों में उनका रसूख आज भी कम नहीं हुआ है। हाल ही में एक महत्वपूर्ण नियामक नियुक्ति को लेकर हुए विवाद ने यह साफ कर दिया है कि कैप्टन के पास अभी भी वह 'विशेषाधिकार' है, जो उन्हें अन्य नेताओं से अलग करता है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, कैप्टन की रणनीतियों को कोई भी नजरअंदाज नहीं कर पा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे प्रवासी भारतीयों (NRIs) के लिए पंजाब की यह राजनीतिक उथल-पुथल काफी मायने रखती है। निवेश, भूमि विवाद और विकास परियोजनाओं के चलते ऑस्ट्रेलिया का पंजाबी समुदाय हमेशा राज्य की सत्ता संरचना पर नजर रखता है। भगवंत मान सरकार द्वारा लिए जा रहे ये कड़े फैसले और प्रशासनिक बदलाव सीधे तौर पर प्रवासियों के हितों को भी प्रभावित करते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये राजनीतिक समीकरण पंजाब के विकास और शासन की दिशा को किस ओर ले जाते हैं।
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