ऑस्ट्रेलिया
'पॉटरिंग': क्या बिना किसी लक्ष्य के छोटे-मोटे काम करना तनावपूर्ण जीवन का इलाज है?
ICN24 Newsroom 2 अग॰ 2026, 09:35 pm

आधुनिक जीवन की भागदौड़ और हर समय 'उत्पादक' बने रहने के दबाव के बीच 'पॉटरिंग' मानसिक शांति का नया मंत्र बन रहा है। जानें क्यों बिना किसी लक्ष्य के काम करना सेहत के लिए जरूरी है।
आज के डिजिटल युग में हमारी जीवनशैली पूरी तरह से 'ऑप्टिमाइजेशन' यानी हर पल को बेहतर और अधिक उत्पादक बनाने की होड़ में बदल गई है। चाहे वह हमारे चलने के कदमों की गिनती हो, नींद का डेटा ट्रैक करना हो या खाली समय में भी कुछ 'सार्थक' करने का दबाव, हम एक ऐसे चक्र में फंस गए हैं जहां विश्राम भी एक कार्य की तरह महसूस होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस 'ओवर-ऑप्टिमाइजेशन' के दौर में 'पॉटरिंग' (Pottering) मानसिक शांति का एक प्रभावी साधन हो सकता है।
'पॉटरिंग' का अर्थ है बिना किसी विशेष उद्देश्य या समय सीमा के छोटे-मोटे घरेलू कामों में खुद को व्यस्त रखना। इसमें बगीचे की छंटाई करना, अलमारी को बिना किसी खास योजना के व्यवस्थित करना या बस घर में घूमते हुए छोटी-छोटी चीजों को ठीक करना शामिल हो सकता है। यह 'मल्टीटास्किंग' और 'एफिशिएंसी' के बिल्कुल विपरीत है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह अवधारणा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रवासी जीवन अक्सर करियर के निर्माण, परिवार की जिम्मेदारियों और सामाजिक तालमेल के बीच एक निरंतर दौड़ जैसा होता है।
मेलबर्न और सिडनी जैसे बड़े शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों पर अक्सर दोहरा दबाव होता है। एक तरफ करियर में अपनी जगह बनाने की जद्दोजहद और दूसरी तरफ भारत में बैठे परिवार की अपेक्षाएं। इस 'माइग्रेंट हसल' यानी प्रवासियों की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर अपनी सफलता को आंकड़ों और उत्पादकता से मापने लगते हैं। हम जिम जाते हैं तो कैलोरी गिनते हैं, और अगर शांत बैठते हैं तो भी मन में अगले दिन की कार्ययोजना चलती रहती है। यहीं 'पॉटरिंग' की भूमिका आती है, जो हमें सिखाती है कि हर गतिविधि का कोई उत्पादक परिणाम होना जरूरी नहीं है।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, जब हम बिना किसी दबाव के 'पॉटरिंग' करते हैं, तो हमारा मस्तिष्क 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' में चला जाता है। यह वह अवस्था है जहां रचनात्मकता का जन्म होता है और मानसिक थकान कम होती है। यह उस निरंतर तनाव को कम करता है जो हर समय 'सर्वश्रेष्ठ' होने की कोशिश से पैदा होता है। भारतीय संस्कृति में भी 'सहजता' का महत्व रहा है, लेकिन आधुनिक जीवन की आपाधापी में हम इसे भूलते जा रहे हैं।
पॉटरिंग अपनाने का मतलब आलस्य नहीं है, बल्कि यह अपने समय पर फिर से अपना अधिकार जताने का एक तरीका है। यह हमें याद दिलाता है कि हम मशीन नहीं हैं जिन्हें हर मिनट अधिकतम आउटपुट के लिए ट्यून किया जाना चाहिए। ऑस्ट्रेलिया के व्यस्त जीवन में, सप्ताह के अंत में कुछ घंटे केवल 'पॉटरिंग' के लिए निकालना न केवल मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता है, बल्कि जीवन के प्रति हमारे दृष्टिकोण को भी अधिक संतुलित बना सकता है।
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