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यूपी में 'बेटी' वाले बयान पर सियासी घमासान: सीएम योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर साधा निशाना, बोले- 'चेले-चपाटों को समझाएं'

ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 10:31 pm
यूपी में 'बेटी' वाले बयान पर सियासी घमासान: सीएम योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर साधा निशाना, बोले- 'चेले-चपाटों को समझाएं'

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर कटाक्ष करते हुए अपने समर्थकों को नियंत्रित करने की सलाह दी है।

उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों बयानों के बाण तेजी से चल रहे हैं। ताजा मामला समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के एक कथित बयान से जुड़ा है, जिसे लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब मोर्चा संभाल लिया है। इस विवाद ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है, जिसका असर न केवल लखनऊ बल्कि प्रवासी भारतीय समुदायों के बीच भी देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा है कि नेताओं को अपने 'चेले-चपाटों' को शिष्टाचार और मर्यादित भाषा समझाना चाहिए। दरअसल, यह पूरा विवाद एक सार्वजनिक मंच पर दिए गए उस बयान से शुरू हुआ जिसमें महिलाओं और विशेषकर 'बेटी' को लेकर कुछ टिप्पणियां की गई थीं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे सीधे तौर पर महिला अस्मिता का अपमान करार दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन भाषा की मर्यादा का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब सत्ता हाथ से फिसलती है, तो हताशा में ऐसे बयान सामने आते हैं। योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में कानून का शासन सर्वोपरि है और महिलाओं की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने विपक्षी खेमे की ओर इशारा करते हुए कहा कि अराजक तत्वों को बढ़ावा देने के बजाय उन्हें लोकतांत्रिक मर्यादाएं सिखाई जानी चाहिए। मुख्यमंत्री का यह कड़ा रुख आगामी उपचुनावों और राज्य की भविष्य की राजनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए यह घटनाक्रम चर्चा का विषय बना हुआ है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय अक्सर भारत की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अपनी संवेदनशीलता व्यक्त करते रहे हैं। इस विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या भारतीय राजनीति में भाषा का स्तर गिरता जा रहा है। समाजवादी पार्टी की ओर से हालांकि इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया गया है। पार्टी का तर्क है कि उनके बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है ताकि असल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके। फिलहाल, इस 'बयान युद्ध' ने उत्तर प्रदेश की राजनीति का पारा बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में इसके और तेज होने के आसार हैं।
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