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पीएम मेलोनी ने समन अब्बास हत्या मामले में कोर्ट के फैसले का किया स्वागत, कहा- 'संस्कृति के नाम पर महिलाओं की आजादी का दमन मंजूर नहीं'

ICN24 Newsroom 16 जुल॰ 2026, 08:32 pm
पीएम मेलोनी ने समन अब्बास हत्या मामले में कोर्ट के फैसले का किया स्वागत, कहा- 'संस्कृति के नाम पर महिलाओं की आजादी का दमन मंजूर नहीं'

इटली की पीएम मेलोनी ने समन अब्बास की हत्या पर आए कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सांस्कृतिक मान्यताओं के नाम पर महिलाओं के अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने पाकिस्तानी मूल की 18 वर्षीय किशोरी समन अब्बास की हत्या के मामले में अदालत के हालिया फैसले की सराहना की है। मेलोनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इटली में उन लोगों के लिए कोई स्थान नहीं है जो कथित सांस्कृतिक या धार्मिक मान्यताओं की आड़ में महिलाओं की स्वतंत्रता, उनके सम्मान और उनके अस्तित्व को नकारने की मंशा रखते हैं। यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'ऑनर किलिंग' यानी सम्मान के नाम पर की जाने वाली हत्याओं के खिलाफ एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। समन अब्बास की हत्या का मामला 2021 में सामने आया था, जिसने न केवल इटली बल्कि पूरे यूरोप को झकझोर कर रख दिया था। समन ने अपने माता-पिता द्वारा तय की गई एक जबरन शादी से इनकार कर दिया था, जिसके बाद वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। जांच के बाद यह खुलासा हुआ कि उसके अपने ही परिवार ने उसकी जान ले ली। इस मामले में इटली की एक अदालत ने समन के माता-पिता को उम्रकैद की सजा सुनाई है। प्रधानमंत्री मेलोनी ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि न्याय की जीत हुई है और यह संदेश स्पष्ट है कि कानून से ऊपर कोई परंपरा नहीं हो सकती। मेलोनी ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि महिलाओं की आजादी के साथ किसी भी तरह का समझौता मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा, 'समन की हत्या सिर्फ एक अपराध नहीं थी, बल्कि यह उन मूलभूत मूल्यों पर हमला था जिन्हें हमारा समाज संजोता है। हम ऐसी मानसिकता को जड़ जमाने की अनुमति नहीं दे सकते जो महिलाओं को उनकी मर्जी से जीने के अधिकार से वंचित करती है।' प्रधानमंत्री का यह बयान विशेष रूप से उन प्रवासी समुदायों के लिए एक कड़ी चेतावनी माना जा रहा है, जो पश्चिमी देशों में रहने के बावजूद पितृसत्तात्मक और रूढ़िवादी परंपराओं को कानून से ऊपर रखने की कोशिश करते हैं। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के संदर्भ में भी यह मामला अत्यंत प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया जैसे बहुसांस्कृतिक समाज में भी प्रवासी परिवारों के भीतर पुरानी मान्यताओं और आधुनिक व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच टकराव अक्सर देखा जाता है। समन अब्बास का मामला यह याद दिलाता है कि नई पीढ़ी, विशेषकर महिलाओं को अपनी जीवनशैली चुनने का पूरा अधिकार है और समुदाय के नेताओं व परिवारों को इसे स्वीकार करना चाहिए। मेलोनी का रुख यह रेखांकित करता है कि मानवाधिकारों की सार्वभौमिकता किसी भी विशेष सांस्कृतिक पहचान से अधिक महत्वपूर्ण है। इटली सरकार ने इस मामले के बाद प्रवासी एकीकरण की नीतियों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने कानूनों को और सख्त करने के संकेत दिए हैं। समन के पिता को पाकिस्तान से प्रत्यर्पित कर इटली लाया गया था, जो कानूनी प्रक्रिया में एक बड़ी कूटनीतिक सफलता थी। मेलोनी ने विश्वास व्यक्त किया कि यह निर्णय न केवल समन को न्याय दिलाएगा, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक मिसाल के तौर पर कार्य करेगा। अंततः, यह फैसला इस बात की पुष्टि करता है कि किसी भी सभ्य समाज में हिंसा को 'परंपरा' का नाम देकर जायज नहीं ठहराया जा सकता।
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