राजनीति
पीलीभीत गन्ना समिति में लाखों का घोटाला: सरकारी धन निजी खाते में भेजने का आरोप, उच्च स्तरीय जांच शुरू
ICN24 Newsroom 5 जून 2026, 01:30 pm
पीलीभीत की सहकारी गन्ना विकास समिति में वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। लिपिक पर इंसेंटिव की राशि निजी खाते में ट्रांसफर करने का आरोप है।
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद स्थित सहकारी गन्ना विकास समिति में वित्तीय भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। समिति के लिपिक एवं प्रभारी लेखाकार मुनेन्द्र कुमार वर्मा पर अपने पद का दुरुपयोग कर सरकारी खजाने में आने वाली लाखों रुपये की प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) को अपने निजी बैंक खाते में ट्रांसफर करने का आरोप लगा है। इस मामले में जिला गन्ना एवं चीनी आयुक्त से विस्तृत जांच की मांग की गई है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब गायबोझ निवासी शिवनारायण सिंह ने साक्ष्यों के साथ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह घोटाला वित्तीय अनियमितताओं के पिछले चर्चित मामलों की तर्ज पर किया गया है। प्रस्तुत किए गए आयकर रिटर्न (ITR) दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाया गया है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में इफको (IFFCO) से की गई खरीद पर समिति को जो 26,400 रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलनी थी, उसे सरकारी खाते के बजाय आरोपी लिपिक ने अपने व्यक्तिगत खाते में जमा करा लिया।
शिकायत में आगे उल्लेख किया गया है कि भ्रष्टाचार का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। वित्तीय वर्ष 2023-24 में इफको, कृभको और कृभको एमवी जैसी संस्थाओं से हुई खरीद पर प्राप्त 1,11,703 रुपये की राशि भी समिति के खातों से नदारद है। आरोप है कि इस राशि पर काटे गए टीडीएस का रिफंड भी गलत विवरण देकर हासिल किया गया। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2024 के गन्ना समिति चुनाव के दौरान मतदाता सूची की बिक्री से प्राप्त नकदी को भी लेजर और कैश बुक में दर्ज न कर उसका गबन करने का आरोप है।
एक और गंभीर आरोप समिति की जमा पूंजी (FDR) को लेकर है। शिकायतकर्ता के अनुसार, नियमों को ताक पर रखकर समिति का धन उन बैंकों में जमा कराया गया जहां से संबंधित कर्मचारी को निजी कमीशन प्राप्त होता था। साथ ही, यह भी सवाल उठाए गए हैं कि आरोपी लिपिक 1998 में अपनी नियुक्ति के बाद से ही कई स्थानांतरण आदेशों के बावजूद पीलीभीत से बाहर क्यों नहीं भेजा गया।
दूसरी ओर, आरोपी लिपिक मुनेन्द्र कुमार वर्मा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि किसी भी प्रकार के भुगतान का अधिकार केवल सचिव और ज्येष्ठ गन्ना निरीक्षक के पास होता है। उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खुद को निर्दोष बताया है।
जिला गन्ना अधिकारी खुशी राम भार्गव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष टीम गठित करने की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। कृषि प्रधान क्षेत्र होने के कारण पीलीभीत के किसानों और गन्ना समितियों में इस प्रकरण को लेकर काफी आक्रोश है।
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