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वन नेशन पार्टी के अधिकारी की नस्लभेदी टिप्पणी आई सामने: एडॉल्फ हिटलर और श्वेत वर्चस्व का किया समर्थन
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 07:31 pm

वन नेशन पार्टी के एक पदाधिकारी जॉन ड्रू की पुरानी नस्लभेदी सोशल मीडिया पोस्ट सामने आने के बाद ऑस्ट्रेलिया में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है।
ऑस्ट्रेलिया की दक्षिणपंथी राजनीतिक पार्टी 'वन नेशन' (One Nation) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। पार्टी के एक वर्तमान शाखा अधिकारी जॉन ड्रू पर सोशल मीडिया के माध्यम से नस्लभेदी टिप्पणियां करने और श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लगे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ड्रू ने एडॉल्फ हिटलर के नाजी संगठनों का बचाव किया और ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों (एबोरिजिनल समुदाय) के खिलाफ अपमानजनक भाषा का उपयोग किया है।
हालिया खुलासों के अनुसार, ड्रू फिलहाल पार्टी में नीति विकास अधिकारी (Policy Development Officer) के रूप में कार्यरत हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ड्रू ने स्वयं दावा किया था कि उन्हें अतीत में पॉलीन हैनसन की पार्टी से इसलिए निकाल दिया गया था क्योंकि वह 'बहुत अधिक कट्टरपंथी' (too radical) थे, लेकिन अब वे फिर से पार्टी के मुख्य ढांचे का हिस्सा बन चुके हैं। उनकी पोस्ट में ऑस्ट्रेलिया के स्वदेशी लोगों को 'पाषाण युग' का बताया गया और प्रवासियों के प्रति भी तीखी नफरत दिखाई गई।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय और अन्य प्रवासी समूहों के लिए यह घटना चिंता का विषय है। वन नेशन पार्टी का इतिहास हमेशा से सख्त आप्रवासन नीतियों और बहुसांस्कृतिक समाज के विरोध का रहा है। ड्रू जैसे अधिकारियों की पार्टी में उपस्थिति यह दर्शाती है कि पार्टी के भीतर अभी भी ऐसे तत्व मौजूद हैं जो ऑस्ट्रेलिया की विविधता के लिए खतरा बन सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की विचारधारा न केवल सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ती है, बल्कि भारतीय समुदाय सहित सभी प्रवासियों की सुरक्षा और सम्मान को भी प्रभावित करती है।
ड्रू की सोशल मीडिया गतिविधियों में हिटलर यूथ संगठन को 'चरित्र निर्माण' वाला संस्थान बताया गया है। उनके द्वारा साझा की गई सामग्री में नस्लीय श्रेष्ठता और प्रवासियों के विरुद्ध अपमानजनक दावों की भरमार है। जब इन पोस्ट्स के बारे में उनसे संपर्क किया गया, तो उन्होंने अपनी टिप्पणियों को ऐतिहासिक संदर्भ और मुक्त अभिव्यक्ति का मामला बताया। हालांकि, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे शुद्ध घृणा भाषण (Hate Speech) करार दिया है।
ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में 'वन नेशन' की भूमिका हमेशा से विवादास्पद रही है। हालांकि पार्टी ने हाल के वर्षों में अपनी छवि सुधारने की कोशिश की है, लेकिन जॉन ड्रू जैसे कट्टरपंथी सोच वाले व्यक्तियों का पार्टी के नीतिगत पदों पर होना कई सवाल खड़े करता है। भारतीय समुदाय, जो ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था और संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान देता है, अक्सर ऐसी नस्लवादी बयानबाजी का शिकार होता रहा है। यह घटना ऑस्ट्रेलिया में बढ़ते दक्षिणपंथी अतिवाद और राजनीतिक जवाबदेही की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
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