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न्यूयॉर्क में यहूदी समुदाय पर हमलों के बाद भारतीय मूल के विधायक जोहराम ममदानी के खिलाफ DOJ जांच की मांग
ICN24 Newsroom 28 जुल॰ 2026, 09:36 am

न्यूयॉर्क के एक विधायक ने मैनहट्टन में यहूदी समुदाय पर हुए हमलों के मद्देनजर विधानसभा सदस्य जोहराम ममदानी के खिलाफ नागरिक अधिकार जांच की मांग की है।
न्यूयॉर्क की राजनीति में इस समय तनाव का माहौल है। एक वरिष्ठ अमेरिकी विधायक ने औपचारिक रूप से न्याय विभाग (DOJ) से न्यूयॉर्क राज्य विधानसभा के सदस्य जोहराम ममदानी के खिलाफ नागरिक अधिकार जांच शुरू करने का आग्रह किया है। यह मांग मैनहट्टन में हाल ही में हुए दो चाकूबाजी हमलों के बाद की गई है, जिन्हें पुलिस नफरत से प्रेरित अपराध (हेट क्राइम) के रूप में देख रही है। ममदानी, जो भारतीय-युगांडा मूल के एक प्रमुख राजनेता हैं और मशहूर फिल्म निर्माता मीरा नायर के बेटे हैं, पर आरोप लगाया जा रहा है कि उनके बयानों और राजनीतिक रुख ने शहर में विभाजनकारी माहौल पैदा किया है।
आलोचकों का तर्क है कि हाल के महीनों में सार्वजनिक चर्चा का स्तर गिरा है, जिससे नफरत से जुड़ी हिंसा को बढ़ावा मिला है। शिकायतकर्ता विधायक का मानना है कि ममदानी की गतिविधियों और भाषणों की इस संदर्भ में जांच होनी चाहिए कि क्या उन्होंने अनजाने में या जानबूझकर ऐसे तत्वों को प्रोत्साहित किया जो नागरिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। हालांकि, ममदानी के समर्थकों का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक हमला है और उन्हें उनके मुखर मानवाधिकारवादी रुख के कारण निशाना बनाया जा रहा है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। जिस तरह ऑस्ट्रेलिया के सिडनी और मेलबर्न जैसे बहुसांस्कृतिक शहरों में हाल के दिनों में विदेशी संघर्षों के कारण स्थानीय तनाव देखा गया है, ठीक वैसी ही स्थिति न्यूयॉर्क में भी उभर रही है। ऑस्ट्रेलिया में भी हेट स्पीच और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर बहस तेज है, जहां प्रवासी समुदाय अक्सर इस तरह की राजनीतिक खींचतान के बीच खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। यह घटना दिखाती है कि कैसे वैश्विक घटनाएं स्थानीय राजनीति और सामुदायिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती हैं।
न्यूयॉर्क पुलिस विभाग (NYPD) उन चाकूबाजी की घटनाओं की विस्तृत जांच कर रहा है जिनमें यहूदी समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया था। इन हमलों ने न केवल न्यूयॉर्क के यहूदी समुदाय को झकझोर दिया है, बल्कि वहां रहने वाले दक्षिण एशियाई प्रवासियों के लिए भी चिंता पैदा कर दी है। जोहराम ममदानी जैसे नेताओं की भूमिका पर सवाल उठने से यह स्पष्ट है कि प्रवासी समुदायों के प्रतिनिधियों पर अब पहले से कहीं अधिक जिम्मेदारी है कि वे सामाजिक एकता बनाए रखें।
फिलहाल, अमेरिकी न्याय विभाग ने इस अनुरोध पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। लेकिन यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि अमेरिका हो या ऑस्ट्रेलिया, लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह जांच औपचारिक रूप लेती है या इसे राजनीतिक बयानबाजी मानकर टाल दिया जाता है।
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