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नीति आयोग की बैठक में डी.के. शिवकुमार की मांग: प्रवासियों के बढ़ते बोझ के कारण बेंगलुरु को मिले अधिक केंद्रीय सहायता
ICN24 Newsroom 12 जून 2026, 03:00 am

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने नीति आयोग की बैठक में बेंगलुरु के बुनियादी ढांचे के लिए विशेष वित्तीय सहायता की मांग की है।
बेंगलुरु, जिसे भारत की सिलिकॉन वैली के रूप में जाना जाता है, वर्तमान में जनसंख्या के भारी दबाव और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों से जूझ रहा है। नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक के दौरान, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने केंद्र सरकार से शहर के विकास के लिए अधिक वित्तीय सहायता प्रदान करने का पुरजोर आग्रह किया। उन्होंने तर्क दिया कि देश भर से आने वाले प्रवासियों के कारण बेंगलुरु के संसाधनों पर अत्यधिक बोझ पड़ रहा है।
शिवकुमार ने बैठक में स्पष्ट किया कि बेंगलुरु न केवल कर्नाटक की राजधानी है, बल्कि एक वैश्विक तकनीकी केंद्र भी है जो देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने कहा कि शहर में प्रवासियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे सार्वजनिक परिवहन, जल आपूर्ति और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ गया है। उन्होंने केंद्र सरकार को याद दिलाया कि बेंगलुरु की सफलता राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य है और इसके बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर बनाए रखने के लिए विशेष धन की आवश्यकता है।
उपमुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय आर्थिक विकास और रोजगार सृजन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार 'ब्रांड बेंगलुरु' को पुनर्जीवित करने के लिए अथक प्रयास कर रही है, लेकिन राज्य के अकेले संसाधनों से इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को पूरा करना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने टनल रोड और पेरिफेरल रिंग रोड जैसी बड़ी परियोजनाओं के लिए केंद्रीय अनुदान की मांग की, जो यातायात की समस्या को कम करने में सहायक होंगी।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है, क्योंकि प्रवासी भारतीयों (NRIs) का एक बड़ा हिस्सा बेंगलुरु के आईटी क्षेत्र से जुड़ा है। कई ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय परिवार मूल रूप से बेंगलुरु से हैं या वहां निवेश करते हैं। शहर के बुनियादी ढांचे में सुधार से न केवल वहां रहने वाले लोगों का जीवन सुधरेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की व्यापारिक छवि भी मजबूत होगी।
अंत में, शिवकुमार ने केंद्र और राज्यों के बीच एक सहकारी संघीय ढांचे की वकालत की। उन्होंने कहा कि जब कोई शहर पूरे देश के लोगों को रोजगार और अवसर प्रदान करता है, तो उसके विकास की जिम्मेदारी भी सामूहिक होनी चाहिए। नीति आयोग की यह बैठक राज्यों और केंद्र के बीच विकास प्राथमिकताओं पर चर्चा करने का एक महत्वपूर्ण मंच है, और कर्नाटक ने अपनी मांगों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है।
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