ऑस्ट्रेलिया
ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने कैबिनेट का किया विस्तार; जॉन हीली को सौंपी वित्त विभाग की कमान
ICN24 Newsroom 21 जुल॰ 2026, 06:35 am

ब्रिटेन के नवनियुक्त प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने अपनी कैबिनेट की घोषणा की है, जिसमें अनुभवी जॉन हीली को वित्त मंत्री और एड मिलिबैंड को विदेश मंत्री नियुक्त किया गया है।
ब्रिटेन की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत करते हुए, नवनियुक्त प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने अपनी कैबिनेट के प्रमुख पदों की घोषणा कर दी है। इस महत्वपूर्ण फेरबदल में प्रधानमंत्री ने पूर्व रक्षा मंत्री जॉन हीली को वित्त मंत्री (चांसलर ऑफ द एक्सचेकर) के रूप में नियुक्त किया है, जबकि अनुभवी नेता एड मिलिबैंड को विदेश मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह कदम ब्रिटेन की वैश्विक स्थिति और आर्थिक स्थिरता को पुनर्जीवित करने के प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है।
जॉन हीली, जिनके पास रक्षा विभाग का व्यापक अनुभव है, अब एक ऐसे समय में ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था की कमान संभालेंगे जब देश मुद्रास्फीति और विकास दर की चुनौतियों से जूझ रहा है। हीली की छवि एक संतुलित और अनुभवी प्रशासक की रही है, जो रक्षा बजट के प्रबंधन में अपनी दक्षता सिद्ध कर चुके हैं। उनकी नियुक्ति को बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि वे वित्तीय अनुशासन और सामरिक निवेश के बीच संतुलन बनाने के लिए जाने जाते हैं।
दूसरी ओर, एड मिलिबैंड को विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलना यह दर्शाता है कि बर्नहैम सरकार अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अनुभव और कूटनीतिक गहराई को प्राथमिकता दे रही है। मिलिबैंड की नियुक्ति से यह उम्मीद की जा रही है कि ब्रिटेन यूरोपीय संघ के साथ अपने संबंधों को अधिक सुदृढ़ करेगा और राष्ट्रमंडल देशों (Commonwealth countries) के साथ अपनी साझेदारी को नया विस्तार देगा।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए ब्रिटेन का यह राजनीतिक बदलाव विशेष महत्व रखता है। भारत, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के बीच एक त्रिकोणीय संबंध है, जो न केवल व्यापार बल्कि सुरक्षा और प्रवास (migration) पर भी आधारित है। जॉन हीली के रक्षा पृष्ठभूमि से होने के कारण, विशेषज्ञों का मानना है कि 'ऑकस' (AUKUS) समझौते के तहत ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग और भी गहरा होगा। इसके अतिरिक्त, ब्रिटेन में होने वाले किसी भी बड़े आर्थिक निर्णय का सीधा असर वहां रहने वाले प्रवासी भारतीयों पर पड़ता है, जिनके पारिवारिक और व्यावसायिक संबंध ऑस्ट्रेलिया से भी जुड़े हैं।
सिडनी और मेलबर्न में स्थित भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई विश्लेषकों का कहना है कि एड मिलिबैंड की विदेश नीति भारतीय उपमहाद्वीप के प्रति अधिक समावेशी हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय मूल के लोग, जिनके रिश्तेदार ब्रिटेन में भी सक्रिय हैं, इस नई कैबिनेट से वीजा नीतियों और द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में अधिक स्पष्टता की उम्मीद कर रहे हैं। प्रधानमंत्री बर्नहैम ने संकेत दिया है कि उनकी सरकार की प्राथमिकता 'स्थिरता और समावेश' होगी, जो वैश्विक भारतीय समुदाय के हितों के अनुकूल हो सकती है।
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