राजनीति
मीनाक्षी नटराजन प्रकरण: मध्य प्रदेश कांग्रेस में बढ़ सकती है अंदरूनी कलह
ICN24 Newsroom 12 जून 2026, 08:00 am

राज्यसभा नामांकन रद्द होने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी तेज हो गई है। दिग्गज नेताओं के समर्थकों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर आंतरिक मतभेद गहराते नजर आ रहे हैं। पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन के रद्द होने और उसके बाद उपजे घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर गुटबाजी को हवा दे दी है। इस राजनीतिक ड्रामे के केंद्र में दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह और उनके समर्थकों की भूमिका को लेकर बहस छिड़ गई है, जिससे राज्य इकाई में असंतोष बढ़ने की आशंका है।
हालिया घटनाक्रम के बाद दिग्विजय सिंह के समर्थकों ने मुखर होकर दो प्रमुख पहलुओं पर अपना पक्ष रखा है। समर्थकों का तर्क है कि नटराजन के बारे में जानकारी लीक करने का दोष बेवजह सिंह पर मढ़ा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, नटराजन से संबंधित संवेदनशील जानकारी वास्तव में तेलंगाना भाजपा नेताओं द्वारा अपने सांसद सहयोगियों को उपलब्ध कराई गई थी। समर्थकों का कहना है कि इस पूरे मामले में दिग्विजय सिंह की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है, जबकि जानकारी का स्रोत भाजपा के भीतर था।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू जो सिंह के खेमे द्वारा उठाया जा रहा है, वह संगठन पर उनकी पकड़ से जुड़ा है। उनके समर्थकों का दृढ़ विश्वास है कि वर्तमान परिस्थितियों में केवल दिग्विजय सिंह ही प्रदेश कांग्रेस को प्रभावी ढंग से चलाने और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की क्षमता रखते हैं। इस तरह के बयानों से पार्टी के अन्य गुटों में असहजता बढ़ सकती है, जिससे आने वाले दिनों में नेतृत्व के सवाल पर टकराव की स्थिति पैदा होने की संभावना है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से वे जो मध्य प्रदेश से संबंध रखते हैं, भारत की इस राजनीतिक उठापटक पर करीबी नजर रखते हैं। प्रवासी भारतीयों के लिए भारत में उनके गृह राज्य की राजनीतिक स्थिरता निवेश और विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण होती है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे एनआरआई अक्सर इन घटनाक्रमों को लोकतांत्रिक परिपक्वता और संगठनात्मक मजबूती के चश्मे से देखते हैं।
कांग्रेस आलाकमान के लिए अब यह चुनौती है कि वह इन आंतरिक मतभेदों को और बढ़ने से रोके। मीनाक्षी नटराजन प्रकरण ने न केवल एक व्यक्तिगत करियर को प्रभावित किया है, बल्कि पार्टी के भीतर उन दरारों को भी उजागर कर दिया है जिन्हें भरने की सख्त जरूरत है। यदि समय रहते इन विवादों को नहीं सुलझाया गया, तो आगामी चुनावों में पार्टी को संगठनात्मक कमजोरी का सामना करना पड़ सकता है।
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