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दादरा और नगर हवेली: मतदाता सूची में बड़ा फेरबदल, वेरिफिकेशन के बाद 30% वोटर्स का नाम कटने की संभावना

ICN24 Newsroom 12 जुल॰ 2026, 02:31 am
दादरा और नगर हवेली: मतदाता सूची में बड़ा फेरबदल, वेरिफिकेशन के बाद 30% वोटर्स का नाम कटने की संभावना

केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली और दमन-दीव में मतदाता सूची के सत्यापन (SIR) के दौरान चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जहाँ 4.28 लाख में से केवल 3.01 लाख मतदाताओं ने ही फॉर्म भरे हैं।

केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव में चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई 'स्पेशल इंटरनल रिवीजन' (SIR) की प्रक्रिया ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस केंद्र शासित प्रदेश में कुल 4.28 लाख पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें से अब तक केवल 3.01 लाख मतदाताओं ने ही अपने गणना प्रपत्र (गणना फॉर्म) भरकर जमा किए हैं। इसका सीधा अर्थ है कि लगभग 1.27 लाख मतदाताओं, जो कुल मतदाता संख्या का लगभग 30 प्रतिशत हैं, का नाम सूची से हटने की कगार पर है। चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध और सटीक बनाने के लिए की जा रही है। अक्सर देखा गया है कि लोग पलायन कर जाते हैं या उनकी मृत्यु हो जाती है, लेकिन उनका नाम मतदाता सूची में बना रहता है। यह विशेष अभियान 'घोस्ट वोटर्स' या फर्जी मतदाताओं को हटाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों ने अभी तक अपने दस्तावेज या फॉर्म जमा नहीं किए हैं, उन्हें सत्यापन के लिए एक और अवसर दिया जा सकता है, लेकिन फिलहाल के आंकड़े काफी चिंताजनक हैं। इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक दलों के नेताओं का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का गायब होना प्रशासनिक विफलता हो सकती है या फिर लोगों में जागरूकता की कमी। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहाँ प्रवासी मजदूरों की संख्या अधिक है, वहां इस तरह की विसंगतियां अधिक देखी गई हैं। स्थानीय प्रशासन अब घर-घर जाकर इस विसंगति की जांच करने की योजना बना रहा है ताकि किसी भी वास्तविक मतदाता का लोकतांत्रिक अधिकार न छीने। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर चुनावी शुचिता के लिहाज से महत्वपूर्ण है। भारत में डिजिटल इंडिया और आधार-लिंक्ड वोटर आईडी कार्ड जैसी पहलों के बावजूद, जमीनी स्तर पर मतदाता सूची का भौतिक सत्यापन आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। चुनाव आयोग की इस कार्रवाई को पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में एक कड़ा कदम माना जा रहा है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी सख्ती से लागू किया जा सकता है। आगामी चुनावों को देखते हुए, यह मतदाता सूची का शुद्धिकरण परिणाम बदल सकता है। राजनीतिक रणनीतिकार अब इस बात का विश्लेषण कर रहे हैं कि ये 30 प्रतिशत मतदाता किस वर्ग या क्षेत्र से आते हैं। क्या ये वो लोग हैं जो काम के सिलसिले में दूसरे राज्यों में चले गए हैं, या फिर ये आंकड़े किसी बड़ी गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहे हैं? फिलहाल, प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपना नाम सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन कार्यालय से संपर्क करें और आवश्यक प्रपत्र जमा करें।
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