ऑस्ट्रेलिया
सौतेले पिता को 14 महीने तक तड़पने के लिए छोड़ने वाला दोषी जल्द होगा रिहा, अदालत के फैसले से बेटियाँ आहत
ICN24 Newsroom 17 जुल॰ 2026, 11:32 pm
मेलबर्न की एक अदालत ने एक व्यक्ति को अपने सौतेले पिता की घोर लापरवाही के कारण हुई मौत का दोषी पाया है, लेकिन कम सजा के कारण वह जल्द ही पैरोल पर बाहर आ सकता है।
ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक बुजुर्ग को 14 महीनों तक बिस्तर पर तड़पने और उपेक्षित रहने के लिए मजबूर करने वाले व्यक्ति को जेल की सजा सुनाई गई है। हालांकि, सजा की अवधि और पैरोल की शर्तों के कारण वह व्यक्ति कुछ ही हफ्तों में जेल से बाहर आ सकता है, जिससे पीड़ित की बेटियों में भारी आक्रोश और दुख है।
विक्टोरिया की सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए 83 वर्षीय विलियम 'बिल' ओ'कॉनर की मौत के जिम्मेदार उनके सौतेले बेटे को 'गैर-इरादतन हत्या' (manslaughter) का दोषी पाया है। अदालत में पेश किए गए तथ्यों के अनुसार, मृतक विलियम को उनके ही घर में 14 महीनों तक बिस्तर पर अत्यंत दयनीय स्थिति में छोड़ दिया गया था। इस दौरान उनकी देखभाल करने की जिम्मेदारी उनके सौतेले बेटे की थी, लेकिन उसने बुनियादी मानवीय जरूरतों और चिकित्सा सहायता की पूरी तरह से अनदेखी की।
इस मामले ने ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय और व्यापक समाज के बीच बुजुर्गों की देखभाल (Elder Care) और सामाजिक अलगाव को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। भारतीय संस्कृति में जहाँ बुजुर्गों का सम्मान और उनकी सेवा को सर्वोपरि माना जाता है, वहीं इस तरह की घटना ने पारिवारिक संबंधों की जटिलताओं और बुजुर्गों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी को उजागर किया है।
मृतक की बेटियों ने अदालत में अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि उन्हें अपने पिता से मिलने से रोका गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके सौतेले भाई ने उन्हें गुमराह किया और उनके पिता तक उनकी पहुँच को बाधित किया। जब अंततः विलियम ओ'कॉनर की मृत्यु हुई, तब तक उनकी स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल था। बेटियों ने अदालत को बताया कि वे अपने पिता को अंतिम समय में देख तक नहीं सकीं और न ही उन्हें उचित सम्मान के साथ विदाई दे पाईं।
अदालत ने स्वीकार किया कि यह मामला घोर आपराधिक लापरवाही का है। न्यायाधीश ने सजा सुनाते हुए कहा कि हालांकि यह कृत्य गंभीर है, लेकिन सजा तय करते समय कानूनी प्रावधानों और आरोपी की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। दोषी को जेल की सजा सुनाई गई है, लेकिन उसकी पैरोल अवधि इतनी कम रखी गई है कि वह कुछ ही हफ्तों में रिहा होने का पात्र हो जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया में बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार (Elder Abuse) के कई मामले सामने नहीं आ पाते हैं क्योंकि पीड़ित अक्सर अपने ही परिवार के सदस्यों पर निर्भर होते हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के संदर्भ में, भाषा की बाधा और सांस्कृतिक लोकलाज भी कई बार ऐसे मामलों को छिपाने का कारण बनती है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामलों में सख्त सजा की आवश्यकता है ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए और बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। फिलहाल, विलियम की बेटियाँ इस कानूनी फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और उनका कहना है कि उनके पिता को जो न्याय मिलना चाहिए था, वह अधूरा रह गया है।
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