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H-1B वीजा शुल्क पर अमेरिकी अदालत का बड़ा फैसला: क्या ट्रंप युग का 'भारी टैक्स' अब खत्म हो गया है?
ICN24 Newsroom 9 जून 2026, 06:30 pm

अमेरिकी अदालत ने H-1B वीजा के लिए भारी शुल्क वृद्धि को रद्द कर दिया है, जिससे भारतीय आईटी पेशेवरों और अमेरिकी कंपनियों को बड़ी राहत मिली है।
संयुक्त राज्य अमेरिका की एक संघीय अदालत ने H-1B वीजा शुल्क में की गई भारी वृद्धि को रद्द कर दिया है, जिसे आलोचकों ने अक्सर 'ट्रंप-काल का टैक्स' करार दिया था। इस फैसले ने हजारों भारतीय आईटी पेशेवरों और उन अमेरिकी कंपनियों के लिए अनिश्चितता के बादलों को हटा दिया है, जो पिछले साल सितंबर से इस नीति के लागू होने के बाद से बढ़ती लागत से जूझ रहे थे।
यह कानूनी मोड़ भारतीय समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि अमेरिका में काम करने वाले कुशल श्रमिकों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है। अदालत का यह आदेश उन संशोधनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं के बाद आया है, जिनके तहत कुछ वीजा श्रेणियों के लिए आवेदन शुल्क को बढ़ाकर लगभग 100,000 डॉलर तक के वित्तीय बोझ के बराबर कर दिया गया था। कोर्ट ने पाया कि इस शुल्क वृद्धि के पीछे की प्रक्रिया और तर्क कानूनी मानकों पर खरे नहीं उतरते।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी यह समाचार प्रासंगिक है। वैश्विक स्तर पर टेक टैलेंट की आवाजाही परस्पर जुड़ी हुई है। सिडनी और मेलबर्न में स्थित कई आईटी फर्मों और भारतीय प्रवासियों के परिवारों के सदस्य अक्सर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीच करियर के अवसरों के लिए प्रवास करते रहते हैं। अमेरिका में वीजा लागत कम होने से उन पेशेवरों को लाभ होगा जो वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत हैं लेकिन भविष्य में अमेरिकी परियोजनाओं पर जाने की योजना बना रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल आर्थिक बोझ कम करेगा, बल्कि अमेरिकी कंपनियों को सर्वश्रेष्ठ वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने में भी मदद करेगा। पूर्ववर्ती प्रशासन द्वारा लागू किए गए इन कड़े नियमों का उद्देश्य तकनीकी रूप से विदेशी श्रमिकों की भर्ती को महंगा बनाना था ताकि स्थानीय नियुक्तियों को बढ़ावा मिले, लेकिन उद्योग जगत ने इसे नवाचार में बाधा बताया था।
अब जबकि अदालत ने इस शुल्क वृद्धि को अमान्य कर दिया है, आवेदन की लागत फिर से पुराने स्तरों पर लौटने की उम्मीद है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में टेक क्षेत्र आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। भारतीय इंजीनियरों के लिए, जो H-1B कार्यक्रम के प्राथमिक लाभार्थी हैं, यह निर्णय उनके करियर की स्थिरता और वित्तीय भविष्य की दिशा में एक जीत के रूप में देखा जा रहा है।
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