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भारतीय पेशेवरों को बड़ी राहत: अमेरिकी अदालत ने ट्रंप सरकार के 1 लाख डॉलर के H-1B वीजा शुल्क को किया रद्द
ICN24 Newsroom 9 जून 2026, 05:31 pm

अमेरिकी अदालत ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लागू किए गए भारी-भरकम H-1B वीजा शुल्क को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया है, जिससे भारतीय आईटी पेशेवरों को बड़ी राहत मिली है।
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीजा पर लगाए गए 1,00,000 डॉलर (लगभग 84 लाख रुपये) के भारी-भरकम शुल्क को रद्द कर दिया है। अदालत का यह निर्णय उन हजारों भारतीय पेशेवरों और तकनीकी कंपनियों के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है, जो लंबे समय से इस विवादास्पद नीति का विरोध कर रहे थे।
सितंबर 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी उद्घोषणा के माध्यम से इस शुल्क को लागू किया था। इस कदम का मुख्य उद्देश्य विदेशी कुशल श्रमिकों की नियुक्ति को महंगा बनाना था ताकि स्थानीय अमेरिकी कार्यबल को प्राथमिकता दी जा सके। हालांकि, विशेषज्ञों और उद्योग जगत के दिग्गजों ने तर्क दिया था कि यह नीति न केवल भेदभावपूर्ण थी, बल्कि वैश्विक नवाचार और प्रतिस्पर्धा के भी खिलाफ थी।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति द्वारा जारी की गई यह उद्घोषणा प्रशासनिक प्रक्रिया अधिनियम और मौजूदा आव्रजन कानूनों का उल्लंघन करती है। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि सरकार के पास इस तरह के अत्यधिक शुल्क लगाने का कोई कानूनी आधार नहीं है, जो अनिवार्य रूप से कुशल पेशेवरों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने जैसा है।
भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है, क्योंकि H-1B वीजा का सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय नागरिकों को ही प्राप्त होता है। भारत की प्रमुख आईटी कंपनियां जैसे टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो अपने कर्मचारियों को ऑन-साइट परियोजनाओं के लिए अमेरिका भेजने हेतु इसी वीजा श्रेणी पर निर्भर रहती हैं। शुल्क में इतनी बड़ी वृद्धि ने इन कंपनियों की परिचालन लागत को कई गुना बढ़ा दिया था।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय और वहां की आव्रजन नीतियों के परिप्रेक्ष्य में भी इस घटनाक्रम को गौर से देखा जा रहा है। हालांकि यह मामला अमेरिका का है, लेकिन वैश्विक स्तर पर कुशल प्रतिभाओं के आवागमन पर इसके गहरे प्रभाव पड़ते हैं। अक्सर देखा गया है कि जब अमेरिका में आव्रजन नियम सख्त होते हैं, तो भारतीय पेशेवर ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों का रुख करते हैं। अब इस शुल्क के हटने से अमेरिका एक बार फिर भारतीय इंजीनियरिंग और तकनीकी प्रतिभाओं के लिए एक सुलभ विकल्प बन जाएगा।
आप्रवासन विशेषज्ञों का मानना है कि इस अदालती फैसले से न केवल व्यक्तिगत आवेदकों को वित्तीय राहत मिलेगी, बल्कि अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में भी सुधार होगा। आने वाले महीनों में H-1B आवेदनों की संख्या में फिर से उछाल आने की संभावना है, जिससे वैश्विक तकनीकी बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है।
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