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लोकसभा में फिर हंगामा: NEET और राम मंदिर विवाद को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन, प्रश्नकाल बाधित
ICN24 Newsroom 31 जुल॰ 2026, 08:35 pm

नीट पेपर लीक और राम मंदिर निर्माण से जुड़े विवादों को लेकर विपक्षी सांसदों के भारी विरोध के कारण लोकसभा की कार्यवाही लगातार दूसरे सप्ताह भी बाधित रही।
भारतीय संसद के निचले सदन, लोकसभा में सोमवार को एक बार फिर भारी हंगामे के कारण प्रश्नकाल की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। विपक्षी सांसदों, विशेषकर 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के सदस्यों ने नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में कथित अनियमितताओं और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से संबंधित भूमि सौदों में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर जमकर नारेबाजी की। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्य अध्यक्ष की आसंदी के पास पहुंच गए, जिससे सदन में अव्यवस्था फैल गई।
सदन के सत्र की शुरुआत में ही कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार विरोधी नारे लगाए। विपक्ष की मुख्य मांग थी कि सरकार नीट परीक्षा के पेपर लीक मामले पर सदन में विस्तृत चर्चा करे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस मुद्दे पर जवाब दें। इसके साथ ही, हाल ही में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ कथित वित्तीय विवादों को लेकर भी विपक्षी खेमे ने सरकार को घेरने की कोशिश की।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बार-बार विपक्षी सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सदन की मर्यादा बनाए रखना सभी का सामूहिक उत्तरदायित्व है और नारेबाजी किसी समस्या का समाधान नहीं है। हालांकि, विरोध प्रदर्शन की तीव्रता को देखते हुए अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को दोपहर तक के लिए स्थगित कर दिया। यह लगातार दूसरा सप्ताह है जब संसद का महत्वपूर्ण प्रश्नकाल हंगामे की भेंट चढ़ गया है।
ऑस्ट्रेलियाई भारतीय समुदाय के लिए भारत की संसद में हो रही यह हलचल विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में बसे कई प्रवासी भारतीयों के बच्चे और रिश्तेदार अभी भी भारत की प्रतियोगी परीक्षाओं, जैसे कि नीट (NEET), में शामिल होते हैं। चिकित्सा शिक्षा के लिए होने वाली इस प्रतिष्ठित परीक्षा में धांधली की खबरों ने सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय परिवारों के बीच भी चिंता पैदा की है। शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता सीधे तौर पर उन युवाओं के भविष्य को प्रभावित करती है जो भारत को उच्च शिक्षा के केंद्र के रूप में देखते हैं।
सरकार का पक्ष रखते हुए संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार किसी भी जांच से पीछे नहीं हट रही है और सीबीआई पहले से ही नीट मामले की जांच कर रही है। उन्होंने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही में बाधा डालने और महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को रोकने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं का तर्क है कि जब तक लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों का जवाब नहीं मिलता, वे अपना विरोध जारी रखेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद के इस मानसून सत्र में गतिरोध और गहरा सकता है। आगामी दिनों में सरकार को न केवल इन विवादों पर स्पष्टीकरण देना होगा, बल्कि बजट से जुड़े महत्वपूर्ण बिलों को पारित कराने के लिए विपक्ष को विश्वास में लेना होगा। प्रवासी भारतीयों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या संसद इन गंभीर मुद्दों पर एक सार्थक चर्चा की ओर बढ़ पाती है या नहीं।
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