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दक्षिण कोरिया में भारतीयों के लिए नौकरियों की सौगात: स्टेम प्रोफेशनल्स के लिए खुले नए वीज़ा के रास्ते
ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 02:30 pm
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दक्षिण कोरिया ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारतीय विशेषज्ञों को आकर्षित करने के लिए अपनी शीर्ष स्तर की वीज़ा योजना का विस्तार किया है।
दक्षिण कोरिया सरकार ने वैश्विक स्तर पर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) क्षेत्र की प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए एक नई वीज़ा नीति की घोषणा की है। इस कदम से भारत के शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों के लिए कोरियाई प्रायद्वीप में करियर बनाने के नए और सुगम रास्ते खुल गए हैं। सियोल द्वारा अपनी शीर्ष स्तर की वीज़ा श्रेणी के विस्तार का उद्देश्य तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना और देश में कुशल कार्यबल की कमी को दूर करना है।
हाल के वर्षों में दक्षिण कोरिया ने खुद को एक वैश्विक तकनीकी पावरहाउस के रूप में स्थापित किया है। हालांकि, घटती जन्म दर और उम्रदराज होती आबादी के कारण देश को उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में प्रतिभाओं की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या के समाधान के लिए सरकार ने विशेष रूप से भारतीय प्रोफेशनल्स पर ध्यान केंद्रित किया है, जो अपनी तकनीकी दक्षता और शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। यह नई वीज़ा नीति न केवल प्रवास की प्रक्रिया को सरल बनाएगी, बल्कि दीर्घकालिक निवास और परिवार को साथ रखने की सुविधाओं में भी सुधार करेगी।
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों के बीच यह घोषणा अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारतीय समुदाय के लिए, विशेष रूप से वे जो वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया या अन्य पश्चिमी देशों में हैं, यह एक वैकल्पिक और आकर्षक अवसर पेश करता है। ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय समुदाय के कई छात्र और शोधकर्ता अक्सर वैश्विक स्तर पर नए अनुसंधान केंद्रों की तलाश में रहते हैं। दक्षिण कोरिया की सैमसंग, हुंडई और एलजी जैसी दिग्गज कंपनियाँ अब सीधे भारतीय संस्थानों से प्रतिभाओं की भर्ती करने की योजना बना रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव वैश्विक 'प्रतिभा युद्ध' (War for Talent) का हिस्सा है। जहाँ एक ओर ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देश अपनी वीज़ा नीतियों की समीक्षा कर रहे हैं, वहीं दक्षिण कोरिया द्वारा दी जा रही यह ढील भारतीय प्रतिभाओं के लिए एक नया द्वार खोलती है। इस योजना के तहत आने वाले प्रोफेशनल्स को अनुसंधान अनुदान और अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं तक पहुँच प्रदान की जाएगी।
निष्कर्ष के तौर पर, दक्षिण कोरिया का यह कदम भारतीय स्टेम प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ा अवसर है। यह न केवल उनके व्यक्तिगत करियर को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच ज्ञान साझाकरण और तकनीकी सहयोग को भी मजबूती प्रदान करेगा।
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