टेक्नोलॉजी
जियो प्लेटफॉर्म्स की 'स्टारलिंक' को चुनौती: भारत के पास होगा अपना संप्रभु सैटेलाइट नेटवर्क
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 01:53 pm

रिलायंस की जियो प्लेटफॉर्म्स अब सैटेलाइट इंटरनेट क्षेत्र में बड़ा धमाका करने की तैयारी में है, जो भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
भारत के दूरसंचार परिदृश्य में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स अब अंतरिक्ष की गहराइयों से इंटरनेट क्रांति लाने की तैयारी कर रही है। कंपनी का लक्ष्य भारत का अपना 'स्टारलिंक मोमेंट' पैदा करना है, जिसके लिए वह एक संप्रभु लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट समूह (Constellation) स्थापित करने की योजना बना रही है। यह कदम न केवल भारत की डिजिटल संप्रभुता को मजबूत करेगा, बल्कि देश के सुदूर क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
जियो की यह महत्वाकांक्षा एलन मस्क की स्टारलिंक और अमेज़न के प्रोजेक्ट कुइपर जैसी वैश्विक कंपनियों के साथ सीधी प्रतिस्पर्धा की ओर इशारा करती है। अब तक, रिलायंस ने सैटेलाइट संचार के लिए लक्ज़मबर्ग स्थित कंपनी SES के साथ साझेदारी की है, लेकिन 'संप्रभु' नेटवर्क पर जोर देना यह दर्शाता है कि भारत अब विदेशी बुनियादी ढांचे पर निर्भरता कम करना चाहता है। यह रणनीतिक बदलाव राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा गोपनीयता के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें डेटा का नियंत्रण और संचालन पूरी तरह भारतीय सीमाओं के भीतर रहने की संभावना है।
लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट्स पारंपरिक सैटेलाइट्स की तुलना में पृथ्वी की सतह के बहुत करीब (करीब 500 से 2,000 किलोमीटर) होते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा 'लो लेटेंसी' यानी कम समय में सिग्नल का आना-जाना है। ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में जहां फाइबर केबल बिछाना मुश्किल है, वहां यह तकनीक गेम-चेंजर साबित होगी। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से दिलचस्प है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया पहले से ही अपनी विशाल और विरल आबादी के लिए स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट सेवाओं का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहा है। भारत का यह स्वदेशी प्रयास दिखाता है कि वह अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बनने की राह पर है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जियो की इस पहल से भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड की लागत में कमी आ सकती है। जिस तरह जियो ने 4G लॉन्च करके मोबाइल डेटा की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट लाई थी, वैसी ही उम्मीद अब सैटेलाइट इंटरनेट से लगाई जा रही है। हालांकि, इस क्षेत्र में स्पेक्ट्रम आवंटन और नियामक चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन भारत सरकार की 'स्पेस पॉलिसी' ने निजी क्षेत्र के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं।
निष्कर्ष के तौर पर, जियो का यह 'संप्रभु' मिशन न केवल एलन मस्क को कड़ी टक्कर देगा, बल्कि डिजिटल इंडिया के सपने को अंतरिक्ष तक ले जाएगा। यह वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी धाक जमाने की दिशा में एक बड़ा साहसी कदम है, जो भविष्य में वैश्विक कनेक्टिविटी बाजार के समीकरण बदल सकता है।
संबंधित ख़बरें

technology
G7 शिखर सम्मेलन: एआई के भविष्य और अमेरिकी तकनीकी प्रभुत्व पर वैश्विक नेताओं के बीच गहन चर्चा
G7 शिखर सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के भविष्य और इस क्षेत्र में अमेरिका के बढ़ते एकाधिकार को लेकर वैश्विक नेताओं ने चिंता जताई है, जिसका सीधा असर ऑस्ट्रेलिया में भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों पर पड़ेगा।
20 जून 2026, 06:41 pm

technology
बिग टेक की सस्ती एआई की तैयारी: क्या भारत बनेगा एआई क्रांति का नया केंद्र?
गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे दिग्गज अब किफायती एआई समाधानों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। जानिए कैसे यह बदलाव भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम और डिजिटल भविष्य को बदल सकता है।
20 जून 2026, 06:26 pm

technology
क्या और महंगे होंगे आईफोन और मैकबुक? टिम कुक ने बताया क्यों कीमतों में बढ़ोतरी अब 'अनिवार्य' है
एप्पल के सीईओ टिम कुक ने संकेत दिया है कि मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की बढ़ती लागत के कारण आईफोन और मैकबुक की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
20 जून 2026, 05:57 pm
