राजनीति
सोनम वांगचुक के आग्रह पर देवेंद्र महतो ने खत्म किया 'जल त्याग', परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ भूख हड़ताल जारी
ICN24 Newsroom 5 अग॰ 2026, 10:37 pm

झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्र नेता देवेंद्र महतो ने सोनम वांगचुक की अपील के बाद जल त्याग समाप्त किया, लेकिन अनशन जारी है।
झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्रों का आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले 12 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र महतो ने प्रसिद्ध लद्दाख कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के विशेष आग्रह के बाद अपना 'जल त्याग' समाप्त कर दिया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी भूख हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाती।
झारखंड स्टेट स्टूडेंट्स यूनियन (JSSU) के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन ने राज्य सरकार की चयन प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि हालिया परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने योग्य उम्मीदवारों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। बुधवार को जब आंदोलन 12वें दिन में प्रवेश कर गया, तो देवेंद्र महतो की बिगड़ती सेहत ने समर्थकों और नागरिक समाज की चिंता बढ़ा दी थी।
सोनम वांगचुक, जो स्वयं लद्दाख के अधिकारों के लिए लंबे अनशन के लिए जाने जाते हैं, ने देवेंद्र महतो को एक संदेश भेजकर उनके साहस की सराहना की। वांगचुक ने अपने संदेश में कहा कि न्याय की लड़ाई लंबी होती है और इसके लिए शरीर का स्वस्थ रहना अनिवार्य है। उन्होंने महतो से आग्रह किया कि वे कम से कम पानी पीना शुरू करें ताकि वे इस संघर्ष को लंबे समय तक जारी रख सकें। वांगचुक की इस अपील के बाद, महतो ने समर्थकों की उपस्थिति में पानी पीकर अपना जल त्याग समाप्त किया।
आंदोलनकारियों की मुख्य मांगों में परीक्षाओं की सीबीआई (CBI) जांच, चयन आयोगों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और पेपर लीक मामले में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शामिल है। रांची के मोरहाबादी मैदान के पास जुटे छात्रों का कहना है कि वे पिछले कई सालों से तैयारी कर रहे हैं, लेकिन भ्रष्टाचार की वजह से उनकी मेहनत बेकार जा रही है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर चिंता का विषय है। कई प्रवासी भारतीयों के परिवार और रिश्तेदार इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। सिडनी और मेलबर्न में रहने वाले झारखंडी समुदाय के सदस्यों ने सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलन को समर्थन दिया है। उनका मानना है कि भारत में शैक्षणिक और रोजगार व्यवस्था में पारदर्शिता प्रवासी भारतीयों के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अपने मूल देश में एक मजबूत और निष्पक्ष शासन प्रणाली देखना चाहते हैं।
वर्तमान में, राज्य प्रशासन ने छात्रों से बातचीत की पेशकश की है, लेकिन प्रदर्शनकारी किसी भी समझौते से पहले लिखित आश्वासन और ठोस कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। देवेंद्र महतो के स्वास्थ्य पर डॉक्टरों की एक टीम लगातार नजर रख रही है, जबकि आंदोलन स्थल पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है।
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