राजनीति
जंतर-मंतर पर इंटरनेट सेवा बंद होने से मचा हड़कंप, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की आशंका: कॉजपा
ICN24 Newsroom 23 जुल॰ 2026, 07:35 am

कॉकरोच जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं, जिससे प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का डर पैदा हो गया है।
नई दिल्ली के ऐतिहासिक विरोध स्थल जंतर-मंतर पर एक बार फिर तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने बुधवार को गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन ने जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह से निलंबित कर दिया है। पार्टी के अनुसार, यह कदम छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने और किसी बड़ी पुलिस कार्रवाई की तैयारी का हिस्सा हो सकता है।
कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर इस स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि इंटरनेट बंद होने के कारण आंदोलनकारियों का संपर्क बाहरी दुनिया से कट गया है। दीपके ने सवाल उठाया कि क्या सरकार एक बार फिर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे युवाओं पर बल प्रयोग करने की योजना बना रही है। सोशल मीडिया पर उनके इस पोस्ट के बाद नागरिक समाज और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जंतर-मंतर लंबे समय से भारत में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों का केंद्र रहा है। हाल के दिनों में यहां विभिन्न मुद्दों को लेकर छात्र संगठनों की सक्रियता बढ़ी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि इंटरनेट का निलंबन न केवल संचार के अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि यह सूचनाओं के प्रसार को रोकने की एक सोची-समझी रणनीति भी है। जब भी किसी स्थान पर डिजिटल संचार बंद किया जाता है, तो वहां पारदर्शिता की कमी हो जाती है, जिससे पुलिसिया कार्रवाई के दौरान साक्ष्य जुटाना कठिन हो जाता है।
भारत में इंटरनेट शटडाउन का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय रहता है। डिजिटल अधिकारों के लिए काम करने वाली वैश्विक संस्थाएं अक्सर भारत को दुनिया में सबसे अधिक इंटरनेट बंद करने वाले देशों की सूची में रखती हैं। दिल्ली जैसे महानगर के केंद्र में इस तरह की पाबंदी ने सुरक्षा एजेंसियों और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। हालांकि, खबर लिखे जाने तक दिल्ली पुलिस या गृह मंत्रालय की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर चिंता का विषय है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय भारतीय प्रवासियों के समूह अक्सर भारत में नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर नजर रखते हैं। ऑस्ट्रेलिया-भारत के बढ़ते कूटनीतिक रिश्तों के बीच, भारत में मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ी खबरें यहां के प्रवासियों के बीच गहरी चर्चा का विषय बनती हैं। कई प्रवासी संगठनों ने सोशल मीडिया के माध्यम से भारत में छात्रों की सुरक्षा और पारदर्शी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की वकालत की है।
फिलहाल, जंतर-मंतर पर स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। छात्र समूहों ने स्पष्ट किया है कि वे डराने-धमकाने की किसी भी कोशिश के बावजूद पीछे नहीं हटेंगे। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक तापमान और बढ़ने के आसार हैं। प्रशासन की ओर से इंटरनेट बहाली को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं दी गई है।
संबंधित ख़बरें
राजनीति
अमेरिका और सऊदी अरब के बीच ऐतिहासिक नागरिक परमाणु समझौता: दशकों लंबी साझेदारी की नींव
अमेरिका और सऊदी अरब ने एक नागरिक परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर के ऊर्जा सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा।
23 जुल॰ 2026, 09:35 am

राजनीति
उत्तर प्रदेश की सियासत में उबाल: 'पुलिस नहीं, गुंडों ने चलाई लाठियां', केशव प्रसाद मौर्य के बयान ने बढ़ाई हलचल
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के हालिया बयान ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
23 जुल॰ 2026, 08:35 am

राजनीति
सोनम वांगचुक और सीमावर्ती नेतृत्व: भारतीय लोकतंत्र में 'वफादारी' की कठिन कसौटी
लद्दाख के सोनम वांगचुक और भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों के नेताओं को अक्सर अपनी निष्ठा साबित करने के लिए दबाव का सामना करना पड़ता है, जो भारतीय लोकतंत्र की विविधता के लिए एक चुनौती है।
23 जुल॰ 2026, 06:35 am
