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भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि: एस्ट्रोबेस ने पहले स्वदेशी FFSC इंजन का परीक्षण शुरू किया
ICN24 Newsroom 11 जुल॰ 2026, 04:31 am

एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज ने भारत के पहले 80-टन क्लास फुल-फ्लो स्टैज्ड कंबशन इंजन का हॉट-फायर परीक्षण शुरू कर दिया है, जो पुन: प्रयोज्य रॉकेट तकनीक में एक बड़ी छलांग है।
भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। हैदराबाद स्थित स्पेस-टेक स्टार्टअप, एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज (Astrobase Space Technologies), अब भारत के पहले पूर्णतः एकीकृत 80-टन श्रेणी के फुल-फ्लो स्टैज्ड कंबशन (FFSC) इंजन के हॉट-फायर परीक्षण की दहलीज पर खड़ा है। कंपनी ने पुष्टि की है कि उसके लिक्विड ऑक्सीजन (LOX) पावरहेड हार्डवेयर ने आंध्र प्रदेश के अनंतपुर स्थित परीक्षण केंद्र में अपनी तैयारी शुरू कर दी है। यह विकास भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनियों की बढ़ती ताकत और जटिल प्रणोदन प्रणालियों (propulsion systems) में उनकी महारत को दर्शाता है।
फुल-फ्लो स्टैज्ड कंबशन इंजन को रॉकेट इंजीनियरिंग की दुनिया में सबसे कठिन और उन्नत तकनीकों में से एक माना जाता है। वर्तमान में, विश्व स्तर पर केवल कुछ ही संस्थाएं, जिनमें स्पेसएक्स (SpaceX) का रैप्टर इंजन प्रमुख है, इस तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग कर रही हैं। पारंपरिक इंजनों के विपरीत, FFSC तकनीक ईंधन और ऑक्सीडाइज़र दोनों का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करती है, जिससे इंजन की दक्षता और शक्ति में भारी वृद्धि होती है। यह तकनीक विशेष रूप से उन रॉकेटों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्हें बार-बार इस्तेमाल किया जाना है (Reusable Launch Vehicles), क्योंकि यह इंजन पर दबाव कम करती है और उसकी उम्र बढ़ाती है।
एस्ट्रोबेस का यह सफल परीक्षण भारत के 'न्यूस्पेस' अभियान के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। अब तक, इस तरह की भारी और जटिल तकनीक केवल इसरो (ISRO) जैसी सरकारी संस्थाओं के पास थी, लेकिन एस्ट्रोबेस ने साबित कर दिया है कि भारतीय स्टार्टअप अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हैं। 80-टन श्रेणी का यह इंजन बड़े उपग्रहों को कक्षा में भेजने और भविष्य के अंतरग्रहीय मिशनों के लिए आधारशिला रखेगा। इस इंजन की सबसे बड़ी विशेषता इसका पुन: उपयोग करने योग्य होना है, जो प्रक्षेपण की लागत को काफी कम कर देगा।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष गर्व का विषय है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष एजेंसी (ASA) और इसरो के बीच हुए समझौतों के साथ-साथ, कई भारतीय स्टार्टअप अब ऑस्ट्रेलियाई फर्मों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। हाल ही में गागनयान मिशन के लिए ऑस्ट्रेलिया के कोकोस द्वीप समूह में ट्रैकिंग सुविधा स्थापित करने के निर्णय ने दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत किया है। एस्ट्रोबेस जैसी कंपनियों की सफलता से भविष्य में भारत-ऑस्ट्रेलिया संयुक्त अंतरिक्ष मिशनों की संभावनाएं और भी प्रबल हो गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस इंजन का सफल हॉट-फायर परीक्षण भारत को वैश्विक वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा। यह न केवल घरेलू प्रक्षेपण क्षमताओं को बढ़ाएगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए भारत को एक किफायती और भरोसेमंद विकल्प के रूप में भी पेश करेगा। अनंतपुर में चल रहे ये परीक्षण अगले कुछ हफ्तों तक जारी रहेंगे, जिस पर पूरी दुनिया की अंतरिक्ष एजेंसियों की नजर टिकी हुई है।
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