शिक्षा
RSS से जुड़े संगठन की सलाह: कई भारतीय विश्वविद्यालयों ने दस्तावेजों में 'इंडिया' की जगह 'भारत' का उपयोग शुरू किया
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 05:26 pm
आरएसएस से जुड़े भारतीय भाषा समिति के सुझाव पर कई विश्वविद्यालयों ने अपने डिग्री और आधिकारिक दस्तावेजों में 'इंडिया' शब्द को हटाकर 'भारत' का उपयोग करना शुरू कर दिया है।
भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा प्रशासनिक और प्रतीकात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े एक निकाय की सलाह के बाद, देश के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों ने अपने आधिकारिक दस्तावेजों, डिग्री प्रमाणपत्रों और लेटरहेड्स में 'इंडिया' (India) शब्द की जगह 'भारत' (Bharat) का उपयोग करना शुरू कर दिया है। यह कदम देश की औपनिवेशिक विरासत को पीछे छोड़कर स्वदेशी पहचान को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बदलाव भारतीय भाषा समिति (BBS) के सुझावों के बाद शुरू हुआ है। यह समिति केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत काम करती है और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए उच्चाधिकार प्राप्त निकाय है। समिति का तर्क है कि 'भारत' शब्द देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करता है। कई केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों ने पहले ही इस बदलाव को लागू कर दिया है, जबकि अन्य इस प्रक्रिया पर विचार कर रहे हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के माध्यम से शिक्षा प्रणाली के 'भारतीयकरण' पर जोर दे रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नाम में यह बदलाव केवल भाषाई नहीं है, बल्कि यह एक गहरे सांस्कृतिक बदलाव का संकेत है। दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू जैसे संस्थानों में भी इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है। कुछ विश्वविद्यालयों ने स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्रियों पर अब हिंदी और अंग्रेजी दोनों संस्करणों में 'भारत' लिखना अनिवार्य कर दिया है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्र एक बड़ी संख्या में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और कई भारतीय पेशेवर वहां कार्यरत हैं। नाम में इस बदलाव का असर उन दस्तावेजों पर भी पड़ेगा जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता और सत्यापन के लिए भेजे जाते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि आधिकारिक नाम परिवर्तन से डिग्री की वैश्विक वैधता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर एकरूपता बनाए रखने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
आलोचकों का तर्क है कि इस तरह के बदलावों से प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ सकती हैं, खासकर उन छात्रों के लिए जो विदेश में पढ़ाई या नौकरी के लिए आवेदन कर रहे हैं। हालांकि, समर्थकों का कहना है कि संविधान में भी 'इंडिया, जो कि भारत है' (India, that is Bharat) का उल्लेख है, इसलिए 'भारत' शब्द का उपयोग संवैधानिक रूप से पूरी तरह वैध है। यह कदम आने वाले समय में भारत के अन्य शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में भी बड़े बदलावों का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
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