ऑस्ट्रेलिया
ICAC जांच: 'मिस्टर टेन परसेंट' रॉबर्ट असफ ने स्वीकारी फर्जी बिलों की बात, पूर्व मित्र पर मढ़ा दोष
ICN24 Newsroom 31 जुल॰ 2026, 11:35 pm
NSW भ्रष्टाचार आयोग की सुनवाई में रॉबर्ट असफ ने फर्जी चालान बनाने की बात स्वीकार की, लेकिन अपनी खराब याददाश्त का हवाला देते हुए दोष अपने दोस्त पर डाल दिया।
न्यू साउथ वेल्स के भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (ICAC) की हालिया सुनवाई ने ऑस्ट्रेलिया के प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस जांच के केंद्र में रॉबर्ट असफ हैं, जिन्हें उनकी कथित गतिविधियों के कारण 'मिस्टर टेन परसेंट' (Mr Ten Per Cent) के नाम से भी जाना जा रहा है। शुक्रवार को हुई एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान, असफ ने अंततः यह स्वीकार किया कि उन्होंने फर्जी चालान (फेक इनवॉइस) जमा किए थे। हालांकि, उन्होंने इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेने के बजाय इसका दोष अपने एक पूर्व मित्र पर डालने की कोशिश की।
ICAC की यह जांच सरकारी अनुबंधों में धांधली और अवैध कमीशन से जुड़ी है। असफ की स्वीकारोक्ति इस मामले में एक बड़ा मोड़ है, क्योंकि इससे पहले वह कई आरोपों से इनकार करते रहे थे। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, जो सिडनी और न्यू साउथ वेल्स के अन्य हिस्सों में व्यापार और सार्वजनिक सेवाओं में प्रमुखता से सक्रिय है, यह मामला ऑस्ट्रेलिया में भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कानूनों और निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली को समझने का एक उदाहरण है। ऑस्ट्रेलिया में सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया जाता है।
सुनवाई के दौरान असफ के जवाबों ने आयोग के सदस्यों को काफी निराश किया। कई महत्वपूर्ण सवालों पर उन्होंने 'मुझे याद नहीं' का सहारा लिया, जिसे आयोग ने 'चुनिंदा याददाश्त' (selective memory) करार दिया। जब जांच अधिकारियों ने उनके सामने पुख्ता दस्तावेजी सबूत और बैंक रिकॉर्ड पेश किए, तब जाकर उन्होंने माना कि कुछ बिल वास्तव में फर्जी थे। उन्होंने अपना बचाव करते हुए दावा किया कि उनका एक पूर्व दोस्त, जिसे उन्होंने 'धोखेबाज' (dodgy) बताया, इन सब के पीछे असली मास्टरमाइंड था।
'मिस्टर टेन परसेंट' का उपनाम उन आरोपों से उपजा है कि असफ कथित तौर पर विभिन्न सौदों में दस प्रतिशत का गुप्त कमीशन लेते थे। आयोग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या ये भुगतान सार्वजनिक अधिकारियों को दी जाने वाली रिश्वत का हिस्सा थे। भारतीय प्रवासियों के लिए, जो ऑस्ट्रेलिया के कॉर्पोरेट जगत में कदम रख रहे हैं, यह घटनाक्रम व्यावसायिक नैतिकता (business ethics) और पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित करता है।
यह मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की उम्मीद है। ICAC इस साजिश में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने और सार्वजनिक कोष को हुए नुकसान का आकलन करने में जुटा है। इस सुनवाई के निष्कर्षों के आधार पर भविष्य में आपराधिक मुकदमे चलाए जा सकते हैं। यह मामला यह स्पष्ट संदेश देता है कि ऑस्ट्रेलिया का कानूनी तंत्र सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति रखता है।
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