राजनीति
हंगरी का बड़ा फैसला: फिलीपींस, जॉर्जिया और आर्मेनिया के नागरिकों के लिए वर्क वीजा पर लगाई रोक
ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 09:00 pm

हंगरी सरकार ने शुक्रवार से तीन देशों के नागरिकों के लिए नए वर्क वीजा जारी करने पर रोक लगा दी है, जिससे अतिथि श्रमिकों के नियमों में सख्ती आई है।
हंगरी की सरकार ने विदेशी श्रम कानूनों को सख्त करते हुए एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। शुक्रवार से प्रभावी होने वाले इस नए आदेश के तहत, फिलीपींस, जॉर्जिया और आर्मेनिया के नागरिकों के लिए नए वर्क वीजा (कार्य वीजा) जारी करने पर रोक लगा दी गई है। यह निर्णय प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन की सरकार द्वारा विदेशी कार्यबल के प्रवाह को नियंत्रित करने और स्थानीय रोजगार बाजार को प्राथमिकता देने के प्रयासों के तहत लिया गया है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह प्रतिबंध फिलहाल अनिश्चित काल के लिए लगाया गया है। सरकार का तर्क है कि देश की सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन को बनाए रखने के लिए अतिथि श्रमिकों (गैस्ट वर्कर्स) की संख्या को सीमित करना आवश्यक है। हालांकि, आर्थिक विशेषज्ञों और विदेशी निवेशकों ने इस कदम पर चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि हंगरी पहले से ही श्रम शक्ति की कमी से जूझ रहा है और इस तरह के प्रतिबंधों से देश की विनिर्माण और औद्योगिक परियोजनाओं की गति धीमी हो सकती है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के दृष्टिकोण से यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर इमिग्रेशन और वर्क वीजा नीतियों में आ रहे बदलावों का असर प्रवासी श्रमिकों के भविष्य पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोग अक्सर यूरोपीय देशों में व्यावसायिक अवसरों पर नजर रखते हैं। हंगरी द्वारा उठाए गए इस कदम से संकेत मिलता है कि यूरोप के कई देश अब 'प्रोटेक्शनिस्ट' या संरक्षणवादी नीतियों की ओर बढ़ रहे हैं, जो भविष्य में अन्य देशों के कामगारों के लिए भी चुनौतियां पैदा कर सकते हैं।
हंगरी में काम कर रही कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने चेतावनी दी है कि श्रम आपूर्ति में बाधा आने से उनकी उत्पादन क्षमता प्रभावित होगी। विशेष रूप से ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र, जो विदेशी कुशल श्रमिकों पर काफी हद तक निर्भर हैं, इस नए नियम से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा वीजा धारकों पर इसका तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन नए आवेदनों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पूरे यूरोप में प्रवासन (माइग्रेशन) एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। हंगरी की इस सख्ती को अन्य यूरोपीय देशों द्वारा भी बारीकी से देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या हंगरी इस सूची में और देशों को शामिल करता है या बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण नियमों में ढील दी जाती है।
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