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बालिगुडा के शुभम सौरभ ने पास की NEET परीक्षा: फल विक्रेता का बेटा अब बनेगा डॉक्टर
ICN24 Newsroom 22 जुल॰ 2026, 07:35 pm
ओडिशा के बालिगुडा में बस स्टैंड पर फल बेचने वाले सुशांत कुमार साहू के बेटे शुभम ने नीट परीक्षा पास कर ली है। अब वह डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहते हैं।
ओडिशा के कंधमाल जिले के एक छोटे से कस्बे बालिगुडा से सफलता की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। यहाँ एक साधारण फल विक्रेता के बेटे शुभम सौरभ ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया है कि अगर संकल्प मजबूत हो, तो संसाधनों की कमी कभी बाधा नहीं बन सकती। शुभम अब डॉक्टर बनने की राह पर अग्रसर हैं, जिससे उनके परिवार और क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।
शुभम के पिता सुशांत कुमार साहू बालिगुडा बस स्टैंड पर एक छोटी सी फलों की दुकान चलाते हैं। वर्षों से वह कड़ी धूप और बरसात में मेहनत कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। उनकी आय बहुत सीमित है, लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी आर्थिक तंगहाली को बेटे की पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया। शुभम की माँ रश्मिता साहू एक गृहिणी हैं और उन्होंने घर के सीमित संसाधनों में भी शुभम के लिए एक ऐसा वातावरण तैयार किया जहाँ वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सके।
अपनी इस उपलब्धि पर बात करते हुए शुभम सौरभ ने कहा कि उनकी सफलता का श्रेय उनके माता-पिता के त्याग और निरंतर सहयोग को जाता है। उन्होंने बताया कि मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका सपना एक विशेषज्ञ डॉक्टर बनने का है। शुभम भविष्य में नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologist) या हृदय रोग विशेषज्ञ (Cardiologist) के रूप में अपनी सेवाएँ देना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "मेरे पिता ने मुझे यहाँ तक पहुँचाने के लिए बहुत मेहनत की है। अब मेरी बारी है कि मैं डॉक्टर बनकर गरीब और जरूरतमंद लोगों का इलाज करूँ।"
भारत में नीट जैसी अत्यधिक प्रतिस्पर्धी परीक्षा को पास करना किसी भी छात्र के लिए एक बड़ी चुनौती होती है, खासकर उन छात्रों के लिए जो ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं। शुभम की यह जीत केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह बालिगुडा जैसे छोटे इलाकों के सैकड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी कहानी दर्शाती है कि उच्च शिक्षा और चिकित्सा जैसे प्रतिष्ठित क्षेत्रों में प्रवेश अब केवल संपन्न परिवारों तक सीमित नहीं रह गया है।
स्थानीय समुदाय और बालिगुडा के निवासियों ने शुभम और उनके परिवार को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर बधाई दी है। बस स्टैंड पर फल खरीदने आने वाले लोग भी सुशांत कुमार साहू की इस सफलता पर खुशी जाहिर कर रहे हैं। यह कहानी उन प्रवासियों के लिए भी विशेष महत्व रखती है जो विदेशों में बस गए हैं, क्योंकि यह भारत की उस जुझारू भावना और शिक्षा के प्रति अटूट विश्वास की याद दिलाती है, जो आज भी भारतीय समाज की नींव है।
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