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चंद्रयान से लेकर जीनोम इंडिया तक: 12 वर्षों के वैज्ञानिक सुधारों ने कैसे गढ़ी 'विकसित भारत' की नींव
ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 11:01 pm

पिछले 12 वर्षों में भारत ने अंतरिक्ष, कृषि और स्वास्थ्य सेवा में अभूतपूर्व वैज्ञानिक प्रगति की है, जो 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को साकार कर रही है।
नई दिल्ली/सिडनी: भारत जैसे-जैसे अपनी स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 की ओर बढ़ रहा है, देश के 'विकसित भारत' बनने के सपने में विज्ञान और तकनीक की भूमिका केंद्रीय होती जा रही है। पिछले 12 वर्षों में भारत ने न केवल प्रयोगशालाओं में बल्कि आम नागरिकों के जीवन में भी वैज्ञानिक बदलाव देखा है। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, यह प्रगति सशक्तिकरण की एक कहानी है, जो किसानों के खेतों से लेकर अंतरिक्ष की गहराइयों तक फैली हुई है।
भारत की इस वैज्ञानिक यात्रा का सबसे चमकता सितारा अंतरिक्ष क्षेत्र रहा है। अगस्त 2023 में चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक लैंडिंग ने भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित किया। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह गर्व का क्षण था, क्योंकि इसरो और ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष एजेंसी के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। अंतरिक्ष अब केवल अन्वेषण तक सीमित नहीं है; अब यह एक उभरता हुआ स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बन गया है, जहाँ युवा उद्यमी निजी उपग्रह और रॉकेट विकसित कर रहे हैं।
कृषि क्षेत्र में विज्ञान का प्रभाव 'बैंगनी क्रांति' (Purple Revolution) के रूप में दिखाई दे रहा है। जम्मू-कश्मीर के डोडा जैसे दुर्गम क्षेत्रों में वैज्ञानिकों ने अरोमा मिशन के माध्यम से लैवेंडर की खेती शुरू की, जिससे हजारों किसानों की आय में सुधार हुआ। इसी तरह, उपग्रह आधारित मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों ने किसानों को सटीक जानकारी प्रदान कर जोखिमों को कम किया है। अब किसान केवल क्षेत्रीय अनुमानों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि उनके पास अपनी जमीन के लिए विशिष्ट डेटा उपलब्ध है।
स्वास्थ्य सेवा और जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) में भी भारत ने नए मानक स्थापित किए हैं। दशकों बाद भारत ने 'नेफिथ्रोमाइसिन' (Nafithromycin) के रूप में अपनी पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक विकसित की है। इसके अलावा, जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट (GenomeIndia Project) के तहत 10,000 से अधिक मानव जीनोम का अनुक्रमण किया गया है। यह परियोजना भविष्य में 'पर्सनलाइज्ड मेडिसिन' या व्यक्तिगत चिकित्सा के लिए आधार तैयार करेगी, जिससे आनुवंशिक विविधता वाले भारतीय समाज को सटीक उपचार मिल सकेगा।
कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की वैक्सीन निर्माण क्षमता ने दुनिया का ध्यान खींचा। आज भारत केवल जेनेरिक दवाओं का निर्माता ही नहीं, बल्कि मौलिक अनुसंधान का केंद्र भी बन रहा है। हीमोफिलिया के लिए स्वदेशी जीन थेरेपी का सफल परीक्षण इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। 25 टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब और नेशनल मिशन ऑन इंटरडिसिप्लिनरी साइबर फिजिकल सिस्टम्स जैसे कदम भारत को एआई, रोबोटिक्स और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग में भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहे हैं।
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