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H-1B वीजा नियमों पर अमेरिकी अदालत का ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका, भारतीय पेशेवरों को मिली राहत
ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 03:01 pm

अमेरिकी अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीजा नियमों में किए गए कड़े बदलावों को खारिज कर दिया है, जिससे भारतीय आईटी पेशेवरों को बड़ी राहत मिली है।
अमेरिकी न्यायपालिका ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीजा नियमों में किए गए विवादास्पद बदलावों पर रोक लगा दी है। अदालत के इस निर्णय को न केवल भारतीय आईटी कंपनियों और सॉफ्टवेयर पेशेवरों के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि यह अमेरिकी लोकतंत्र में कार्यपालिका की शक्तियों पर अंकुश लगाने की न्यायिक स्वतंत्रता का भी प्रमाण है।
ट्रंप प्रशासन ने 'बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन' नीति के तहत H-1B वीजा के लिए न्यूनतम वेतन की सीमा बढ़ाने और 'विशेषज्ञता वाले व्यवसायों' (Specialty Occupations) की परिभाषा को संकुचित करने का प्रयास किया था। प्रशासन का तर्क था कि ये बदलाव स्थानीय अमेरिकी कामगारों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक हैं। हालांकि, अदालत ने पाया कि सरकार ने इन नियमों को लागू करने में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया और बिना पर्याप्त साक्ष्यों के इन्हें 'आपातकालीन' आधार पर थोपने की कोशिश की।
भारतीय समुदाय और आईटी क्षेत्र के लिए इसके मायने बहुत गहरे हैं। भारत की प्रमुख आईटी कंपनियाँ जैसे टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो अपनी परिचालन लागत और प्रतिभा प्रबंधन के लिए H-1B वीजा पर काफी हद तक निर्भर हैं। इन नियमों के लागू होने से न केवल इन कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ता, बल्कि हजारों भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका में काम करने का सपना भी धुंधला हो जाता।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर प्रासंगिक है। कई भारतीय पेशेवर और छात्र 'ग्लोबल मोबिलिटी' के तहत ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के बीच आवाजाही करते हैं। अमेरिका में वीजा नीतियों का सख्त होना अक्सर अन्य पश्चिमी देशों, जैसे ऑस्ट्रेलिया, की आव्रजन नीतियों पर भी मनोवैज्ञानिक दबाव बनाता है। अमेरिकी अदालत का यह रुख स्पष्ट करता है कि नियम और नीतियाँ केवल राजनीतिक एजेंडे के आधार पर नहीं, बल्कि तर्क और कानून के दायरे में रहकर ही बनाई जा सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अमेरिकी न्यायपालिका की स्वायत्तता है। ऐसे समय में जब राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेशों का प्रभाव बढ़ रहा था, अदालत ने हस्तक्षेप कर यह सुनिश्चित किया कि कार्यपालिका की शक्ति असीमित नहीं है। यह निर्णय उन हजारों वीजा आवेदकों को सुरक्षा प्रदान करता है जो पिछले कुछ वर्षों से अनिश्चितता के माहौल में जी रहे थे। हालांकि आव्रजन सुधारों पर बहस जारी रहेगी, लेकिन फिलहाल भारतीय प्रतिभाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय श्रम बाजार में अपनी जगह बनाए रखने का रास्ता साफ हुआ है।
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