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अमेरिकी तकनीक पर निर्भरता खत्म कर रहा है यूरोप: ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बीच एक बड़ा बदलाव

ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 07:00 pm
अमेरिकी तकनीक पर निर्भरता खत्म कर रहा है यूरोप: ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बीच एक बड़ा बदलाव

डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही यूरोपीय देशों ने अमेरिकी बिग टेक कंपनियों पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए स्वदेशी तकनीक और निवेश पर जोर देना शुरू कर दिया है।

यूरोप अब अमेरिकी 'बिग टेक' कंपनियों के प्रभुत्व से बाहर निकलने की तैयारी में जुट गया है। पिछले एक साल में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच, यूरोपीय देशों और वहां की बड़ी कंपनियों ने अमेरिकी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर पर अपनी भारी निर्भरता को खत्म करने के प्रयासों को तेज कर दिया है। यह कदम न केवल राजनीतिक स्वायत्तता के लिए है, बल्कि इसे आर्थिक सुरक्षा के नजरिए से भी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक बयानों से लेकर घरेलू तकनीकी विकास तक, यूरोप अब करोड़ों यूरो का निवेश कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। लंबे समय से अमेज़न, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों ने यूरोपीय बाजार पर कब्जा कर रखा है, लेकिन अब यूरोपीय संघ (EU) अपनी स्वयं की डिजिटल बुनियादी ढांचा प्रणालियों को मजबूत कर रहा है। भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के लिए यह घटनाक्रम विशेष रूप से प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय और वहां के तकनीकी पेशेवरों के लिए यह एक संकेत है कि भविष्य का बाजार अब केवल सिलिकॉन वैली तक सीमित नहीं रहेगा। जिस तरह यूरोप अपनी 'डिजिटल संप्रभुता' की बात कर रहा है, उसी तरह भारत और ऑस्ट्रेलिया भी डेटा स्थानीयकरण और घरेलू तकनीक को बढ़ावा दे रहे हैं। अगर यूरोप इस बदलाव में सफल होता है, तो यह वैश्विक टेक सप्लाई चेन में एक बड़ा मोड़ होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने यूरोपीय नेताओं को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। अब जोर इस बात पर है कि डेटा का भंडारण और प्रसंस्करण यूरोपीय धरती पर ही हो और स्थानीय नियमों के अनुसार हो। इसके लिए यूरोपीय संघ ने कई सख्त नियामक कानून भी लागू किए हैं, जो अमेरिकी कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगाते हैं। अंततः, यह केवल तकनीक का मामला नहीं है, बल्कि यह संप्रभुता और शक्ति संतुलन की लड़ाई है। यूरोपीय कंपनियां अब ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म और स्थानीय समाधानों को प्राथमिकता दे रही हैं। हालांकि, दशकों पुरानी निर्भरता को रातों-रात खत्म करना आसान नहीं होगा, लेकिन यूरोप की यह नई दिशा स्पष्ट कर रही है कि तकनीक की दुनिया में अब नए ध्रुव बनने की शुरुआत हो चुकी है।
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