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भारत में डिजिटल अंतर: 27 प्रतिशत परिवार अब भी इंटरनेट सुविधा से वंचित, NCAER की रिपोर्ट में खुलासा
ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 09:00 pm

एनसीएईआर की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मोबाइल फोन की व्यापक पहुंच के बावजूद 27 प्रतिशत परिवार अब भी इंटरनेट के बिना रहने को मजबूर हैं।
नई दिल्ली: नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) की एक हालिया रिपोर्ट ने भारत में 'डिजिटल इंडिया' अभियान के दौर में एक गंभीर चुनौती को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के लगभग 27 प्रतिशत परिवार आज भी इंटरनेट की सुविधा से वंचित हैं। यह आंकड़ा तब सामने आया है जब भारत दुनिया के सबसे बड़े स्मार्टफोन बाजारों में से एक है और डेटा की कीमतें वैश्विक स्तर पर सबसे कम हैं।
अध्ययन में पाया गया कि हालांकि मोबाइल फोन की उपलब्धता लगभग हर घर तक पहुंच चुकी है, लेकिन इंटरनेट के उपयोग के मामले में एक बड़ा अंतराल बरकरार है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच यह खाई और भी गहरी नजर आती है। रिपोर्ट बताती है कि बुनियादी ढांचे की कमी, डिजिटल साक्षरता का अभाव और आर्थिक कारण इस डिजिटल विभाजन के पीछे मुख्य कारक हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह रिपोर्ट विशेष महत्व रखती है। प्रवासी भारतीय अक्सर अपने मूल गांवों और परिवारों से वीडियो कॉल और डिजिटल माध्यमों के जरिए जुड़े रहते हैं। इंटरनेट तक पहुंच की कमी न केवल संचार को बाधित करती है, बल्कि भारत में रह रहे उनके परिजनों के लिए सरकारी योजनाओं, ऑनलाइन बैंकिंग और शिक्षा के अवसरों तक पहुंच को भी सीमित कर देती है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में बसे आईटी पेशेवर अक्सर भारत में अपनी जड़ों की डिजिटल प्रगति में निवेश करते हैं, लेकिन यह रिपोर्ट दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर अभी बहुत काम किया जाना बाकी है।
NCAER के शोधकर्ताओं ने रेखांकित किया कि केवल स्मार्टफोन होना इंटरनेट के प्रभावी उपयोग की गारंटी नहीं है। कई परिवारों में डेटा पैक की लागत और नेटवर्क कनेक्टिविटी की खराब गुणवत्ता एक बड़ी बाधा है। विशेष रूप से बुजुर्गों और कम आय वाले समूहों में डिजिटल कौशल की कमी देखी गई है, जिससे वे ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठाने में पिछड़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस डिजिटल खाई को पाटने के लिए सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। केवल बुनियादी ढांचा तैयार करना पर्याप्त नहीं है; किफायती डेटा और व्यापक डिजिटल शिक्षा कार्यक्रम अनिवार्य हैं। आगामी वर्षों में, जैसे-जैसे भारत एक डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, इस 27 प्रतिशत आबादी को मुख्यधारा में लाना समावेशी विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।
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