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अमेरिकी चुनाव में मतदान केंद्रों पर तैनात हो सकते हैं इमिग्रेशन अधिकारी, डीएचएस प्रमुख मार्कवेन मुलिन ने नहीं किया इनकार
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 10:01 am

अमेरिकी गृह सुरक्षा सचिव मार्कवेन मुलिन ने संकेत दिया है कि आगामी चुनावों में मतदान केंद्रों पर आप्रवासन अधिकारियों की उपस्थिति हो सकती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल नागरिक ही वोट दें।
वाशिंगटन — अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग (DHS) के सचिव मार्कवेन मुलिन ने हाल ही में दिए गए एक बयान में चुनावी सुरक्षा और नागरिकता सत्यापन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मुलिन ने यह स्पष्ट करने से इनकार कर दिया कि क्या आगामी चुनावों के दौरान मतदान केंद्रों पर 'इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट' (ICE) के एजेंट तैनात किए जाएंगे या नहीं। उनका तर्क है कि मतदान की कतारों में केवल अमेरिकी नागरिकों को ही खड़े होने का अधिकार है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की प्राथमिकताओं को दोहराते हुए मुलिन ने कहा कि संघीय चुनावों की अखंडता बनाए रखने के लिए नागरिकता की सख्त जांच आवश्यक है। हालांकि अमेरिकी कानून के तहत गैर-नागरिकों का संघीय चुनावों में मतदान करना पहले से ही अवैध है, लेकिन रिपब्लिकन नेता इसे और कड़ाई से लागू करने पर जोर दे रहे हैं। मतदान केंद्रों पर वर्दीधारी इमिग्रेशन अधिकारियों की संभावित मौजूदगी को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय और वहां के प्रवासियों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका में होने वाले नीतिगत बदलाव अक्सर वैश्विक स्तर पर प्रवासन और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर चर्चा को प्रभावित करते हैं। विशेष रूप से उन भारतीय मूल के परिवारों के लिए जिनके रिश्तेदार अमेरिका में ग्रीन कार्ड या एच-1बी वीजा पर रह रहे हैं, मतदान केंद्रों पर सुरक्षा बलों की उपस्थिति एक संवेदनशील विषय बन सकती है। ऑस्ट्रेलिया में भी नागरिकता और मतदान के अधिकार हमेशा चर्चा का केंद्र रहते हैं, लेकिन अमेरिका जैसी आक्रामक निगरानी की मांग वहां कम ही देखी जाती है।
आलोचकों का तर्क है कि मतदान केंद्रों पर आईसीई (ICE) एजेंटों की उपस्थिति से वैध मतदाताओं, विशेषकर अल्पसंख्यकों और प्राकृतिक रूप से नागरिक बने प्रवासियों में भय का माहौल पैदा हो सकता है। उन्हें डर है कि इससे 'वोटर सप्रेशन' या मतदाताओं को डराने की स्थिति बन सकती है। दूसरी ओर, मुलिन और उनके समर्थकों का मानना है कि यह कदम केवल उन लोगों को रोकने के लिए है जो कानूनन मतदान के पात्र नहीं हैं।
फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि इस योजना को किस स्तर पर लागू किया जाएगा, लेकिन मुलिन के बयान ने यह साफ कर दिया है कि ट्रंप प्रशासन चुनावी सुरक्षा को अपनी आप्रवासन नीतियों के साथ जोड़ने के लिए तैयार है। आने वाले महीनों में यह मुद्दा न केवल अमेरिका के भीतर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकतंत्र और मानवाधिकारों की बहस का मुख्य बिंदु बना रहेगा।
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